पंचायत सहायकों को मिल सकती है बड़ी राहत, मानदेय ₹9,000 करने समेत कई अहम प्रस्ताव शासन को भेजे गए
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पंचायत सहायक/अकाउंटेंट-कम-डेटा एंट्री ऑपरेटर (DEO) के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। पंचायतीराज निदेशक की ओर से प्रमुख सचिव, पंचायती राज विभाग को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा गया है, जिसमें पंचायत सहायकों की लंबे समय से लंबित मांगों पर विचार करते हुए कई अहम प्रस्ताव शासन स्तर पर भेजे गए हैं। यह प्रस्ताव 2 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में हुई चर्चा और लिए गए निर्णयों के आधार पर तैयार किया गया है।
पत्र में पंचायत सहायकों के रिक्त पदों पर भर्ती, मानदेय में वृद्धि, शैक्षणिक योग्यता, सरकारी नौकरियों में वरीयता, आयु सीमा में छूट तथा कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालन जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है।
सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव पंचायत सहायकों के मानदेय को लेकर है। वर्तमान में पंचायत सहायकों को ₹6,000 प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। शासन को भेजे गए प्रस्ताव में इसे बढ़ाकर ₹9,000 प्रतिमाह किए जाने की संस्तुति की गई है। यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो प्रदेश के हजारों पंचायत सहायकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
इसके अलावा, पंचायत सहायक/अकाउंटेंट-कम-डेटा एंट्री ऑपरेटर के रिक्त पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया पूरी कराने के लिए सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने का भी प्रस्ताव भेजा गया है, ताकि खाली पदों को शीघ्र भरा जा सके और ग्राम पंचायतों में कार्य प्रभावित न हो।
शासन को भेजे गए प्रस्ताव में कंप्यूटर योग्यता से जुड़े नियमों में भी संशोधन की बात कही गई है। इसके तहत पंचायत सहायकों के लिए O-Level, समकक्ष अथवा उससे उच्च कंप्यूटर प्रमाणपत्र को मान्य करने का सुझाव दिया गया है।
इतना ही नहीं, पंचायत सहायकों को उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में आयु सीमा में छूट तथा अनुभव के आधार पर अतिरिक्त अंक (वेटेज) देने का प्रस्ताव भी शामिल किया गया है। इससे भविष्य में सरकारी नौकरियों में पंचायत सहायकों को लाभ मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
पत्र में ग्राम पंचायतों में संचालित कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) से संबंधित पूर्व शासनादेश में आवश्यक संशोधन का प्रस्ताव भी रखा गया है। साथ ही ग्राम पंचायतों में नियमित चौपाल और खुली बैठकों का आयोजन कर सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने की भी सिफारिश की गई है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि फिलहाल यह केवल शासन को भेजा गया प्रस्ताव है। इन सभी बिंदुओं पर अंतिम निर्णय उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लिया जाएगा। शासन की मंजूरी और आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही मानदेय वृद्धि, भर्ती प्रक्रिया, योग्यता में बदलाव तथा अन्य सुविधाएं लागू होंगी।
प्रदेश के पंचायत सहायकों की नजर अब शासन के अंतिम फैसले पर टिकी हुई है। यदि इन प्रस्तावों को स्वीकृति मिलती है, तो यह पंचायत सहायकों के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।


