लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में प्रभारी प्रधानाध्यापक की नियुक्ति को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण संशोधित शासनादेश जारी किया है। नए आदेश में पूर्व शासनादेश के बिंदु-5 को विलोपित (हटा) दिया गया है। यह संशोधन इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में किया गया है, जिससे अब प्रभारी प्रधानाध्यापक की तैनाती का तरीका बदल जाएगा।
संशोधित शासनादेश के अनुसार, अब केवल विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक को स्वतः प्रभारी प्रधानाध्यापक का कार्यभार नहीं दिया जाएगा। जिन विद्यालयों में नियमित प्रधानाध्यापक का पद रिक्त है, वहां जिला स्तरीय सहायक अध्यापकों की वरिष्ठता सूची के आधार पर प्रभारी प्रधानाध्यापक की तैनाती की जाएगी।
इस बदलाव का प्रभाव उन विद्यालयों पर भी पड़ेगा, जहां प्राथमिक विद्यालयों में 150 से कम तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 100 से कम छात्र नामांकित हैं। पहले ऐसे विद्यालयों में स्थानीय वरिष्ठ शिक्षक को कार्यभार दिए जाने का प्रावधान था, लेकिन अब संशोधित व्यवस्था के तहत जिला स्तरीय वरिष्ठता सूची के अनुसार ही प्रभारी प्रधानाध्यापक नियुक्त किए जाएंगे।
शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि वरिष्ठ सहायक अध्यापक प्रभारी प्रधानाध्यापक का दायित्व लेने के लिए लिखित रूप से असहमति (Undertaking) देते हैं, तो उनके बाद वरिष्ठता क्रम में अगले पात्र सहायक अध्यापक को यह दायित्व सौंपा जाएगा।
बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को निर्देश दिए हैं कि वे हाईकोर्ट के आदेश और संशोधित शासनादेश के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा नियमानुसार प्रभारी प्रधानाध्यापकों की तैनाती करें।
प्रमुख बिंदु
- शासनादेश से बिंदु-5 हटाया गया।
- प्रभारी प्रधानाध्यापक की तैनाती जिला स्तरीय वरिष्ठता सूची के आधार पर होगी।
- स्थानीय विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक को स्वतः कार्यभार देने की व्यवस्था समाप्त।
- रिक्त प्रधानाध्यापक पद वाले सभी विद्यालयों में नई व्यवस्था लागू होगी।
- वरिष्ठ शिक्षक द्वारा असहमति देने पर अगले पात्र वरिष्ठ शिक्षक को दायित्व मिलेगा।
- सभी BSA को संशोधित आदेश के अनुसार कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।






