देश की तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) में अधिकारियों की कमी को दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में रक्षा मंत्रालय ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहा है, जिसके तहत JEE, NEET PG और CLAT PG जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के अंकों या रैंक के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन किया जा सके।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, सेना को अलग-अलग भर्ती परीक्षाएं आयोजित करने की आवश्यकता कम होगी। इसके बजाय राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवारों को सीधे सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (SSB) इंटरव्यू के लिए बुलाया जा सकता है। इससे भर्ती प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और उम्मीदवारों के लिए अधिक सुविधाजनक बनने की उम्मीद है।
रक्षा मंत्रालय का मानना है कि राष्ट्रीय परीक्षाएं पहले से ही बड़े स्तर पर आयोजित होती हैं और इनमें लाखों छात्र भाग लेते हैं। ऐसे में इन परीक्षाओं के परिणामों का उपयोग सेना भर्ती में करने से समय और संसाधनों की बचत होगी, साथ ही प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को बेहतर अवसर भी मिलेंगे।
विशेष रूप से टेक्निकल एंट्री स्कीम (TES) के तहत 12वीं पास छात्रों की भर्ती की जाती है। चयनित अभ्यर्थियों को चार वर्ष की इंजीनियरिंग शिक्षा प्रदान की जाती है और इसके बाद उन्हें सेना में अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाता है। चूंकि इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए पहले से ही JEE (Joint Entrance Examination) अनिवार्य है, इसलिए TES भर्ती में JEE स्कोर का उपयोग एक व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है।
इसी तरह, भविष्य में चिकित्सा और विधि से जुड़े सैन्य पदों के लिए NEET PG और CLAT PG जैसी परीक्षाओं के स्कोर का भी उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, अंतिम चयन प्रक्रिया में SSB इंटरव्यू, मेडिकल परीक्षण और अन्य निर्धारित मानदंड पहले की तरह लागू रहेंगे।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो सेना में भर्ती प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आधुनिक, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बन सकती है। इससे अभ्यर्थियों को अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं की तैयारी और खर्च से भी राहत मिलने की संभावना है। फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श जारी है और अंतिम निर्णय के बाद ही नई व्यवस्था लागू की जाएगी।


