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Google DeepMind CEO का बड़ा दावा, 2030 तक इंसानों से ज्यादा समझदार हो जाएगा AI!

Sir Ji Ki Pathshala

AI की दुनिया में बड़ा दावा: 2030 तक आ सकता है AGI, Google DeepMind के CEO ने बताया मानव इतिहास का अगला बड़ा बदलाव

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। इसी बीच Google DeepMind के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) डेमिस हैसाबिस ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरी टेक इंडस्ट्री में नई चर्चा शुरू कर दी है। उनका मानना है कि यदि AI का विकास इसी गति से जारी रहा, तो वर्ष 2030 के आसपास Artificial General Intelligence (AGI) वास्तविकता बन सकता है।

Google DeepMind CEO डेमिस हैसाबिस द्वारा 2030 तक AGI आने की भविष्यवाणी, AI तकनीक की जानकारी

हैसाबिस के अनुसार, AGI केवल एक नई तकनीक नहीं होगी, बल्कि यह मानव इतिहास के सबसे बड़े तकनीकी बदलावों में से एक साबित हो सकती है। उनका कहना है कि आने वाले वर्षों में लोग पीछे मुड़कर देखेंगे और महसूस करेंगे कि वे AI क्रांति के शुरुआती दौर के गवाह थे।

मुख्य बातें

  • Google DeepMind के CEO डेमिस हैसाबिस का मानना है कि 2030 तक AGI वास्तविकता बन सकता है।
  • AGI ऐसा AI होगा जो इंसानों की तरह सीखने, सोचने, तर्क करने और निर्णय लेने में सक्षम होगा।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक से कई उद्योगों और नौकरियों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
  • हैसाबिस ने AI के सुरक्षित विकास के लिए वैश्विक निगरानी व्यवस्था बनाने की भी वकालत की है।
  • अलग-अलग AI कंपनियों के विशेषज्ञ AGI आने की समय-सीमा को लेकर अलग-अलग अनुमान लगा रहे हैं।
  • AI विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में रचनात्मक सोच और समस्या समाधान जैसी मानवीय क्षमताओं की मांग और बढ़ेगी।

डेमिस हैसाबिस ने क्या कहा?

स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस में बातचीत के दौरान डेमिस हैसाबिस ने कहा कि दुनिया तेजी से ऐसे दौर की ओर बढ़ रही है, जहां AI की क्षमताएं आज की तुलना में कई गुना अधिक विकसित होंगी।

  • उनके अनुसार, अगले कुछ वर्षों में AI केवल सवालों के जवाब देने या कोड लिखने तक सीमित नहीं रहेगा।
  • भविष्य का AGI नई परिस्थितियों को समझने, तर्क करने और अपने अनुभवों से सीखकर निर्णय लेने में सक्षम हो सकता है।
  • उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियां वर्तमान समय को AI क्रांति की शुरुआत के रूप में याद कर सकती हैं।
  • उनका मानना है कि समाज और सरकारों को अभी से इस बदलाव की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।

AGI क्या है और यह मौजूदा AI से कितना अलग होगा?

आज हम जिन AI टूल्स का उपयोग करते हैं, वे किसी विशेष कार्य के लिए प्रशिक्षित होते हैं। इन्हें सीमित या "Weak AI" कहा जाता है। जबकि AGI का उद्देश्य इंसानों जैसी सामान्य बुद्धिमत्ता विकसित करना है।

  • वर्तमान AI केवल उन्हीं कार्यों को बेहतर तरीके से कर सकता है जिनके लिए उसे प्रशिक्षित किया गया है।
  • AGI किसी नए विषय या समस्या को स्वयं समझकर उसका समाधान खोजने की क्षमता रख सकता है।
  • इसमें सीखने, तर्क करने, योजना बनाने और नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने जैसी क्षमताएं होने की कल्पना की जाती है।
  • यदि AGI विकसित होता है, तो वह अलग-अलग क्षेत्रों की जानकारी को जोड़कर नए समाधान भी तैयार कर सकता है।

नौकरियों और उद्योगों पर क्या असर पड़ सकता है?

AI के बढ़ते उपयोग के साथ रोजगार को लेकर भी लगातार चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि AGI कई पेशों में बड़े बदलाव ला सकता है।

  • डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोग्रामर, वकील और रिसर्चर जैसे पेशों में AI की भूमिका पहले से अधिक बढ़ सकती है।
  • कई दोहराए जाने वाले और विश्लेषण आधारित कार्य मशीनों द्वारा किए जा सकते हैं।
  • नई तकनीक के कारण कुछ पारंपरिक नौकरियों की मांग कम हो सकती है, जबकि नई प्रकार की नौकरियां भी पैदा होंगी।
  • हैसाबिस का मानना है कि रचनात्मक सोच, डिजाइन, नेतृत्व और जटिल समस्याओं का समाधान निकालने वाले लोगों की मांग भविष्य में सबसे अधिक रहेगी।

AGI को लेकर विशेषज्ञों की सबसे बड़ी चिंताएं

AGI जितनी बड़ी संभावना लेकर आता है, उतनी ही बड़ी चुनौतियां भी उसके साथ जुड़ी हुई हैं।

  • यदि इस तकनीक का दुरुपयोग हुआ, तो साइबर हमले और फर्जी जानकारी फैलाने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
  • अत्यधिक शक्तिशाली AI सिस्टम पर नियंत्रण बनाए रखना बड़ी चुनौती हो सकता है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि AI के विकास के साथ मजबूत सुरक्षा मानक और स्पष्ट नियम भी जरूरी होंगे।
  • कई शोधकर्ता चाहते हैं कि AGI का विकास पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ किया जाए।

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AGI को लेकर टेक कंपनियों की अलग-अलग राय

दुनिया की प्रमुख AI कंपनियों के विशेषज्ञ AGI के भविष्य को लेकर अलग-अलग अनुमान लगा रहे हैं।

  • OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन का कहना है कि दुनिया डिजिटल सुपरइंटेलिजेंस के काफी करीब पहुंच चुकी है।
  • Anthropic के CEO डारियो अमोडेई का मानना है कि आने वाले कुछ वर्षों में बेहद शक्तिशाली AI सिस्टम सामने आ सकते हैं।
  • DeepMind के वैज्ञानिक शेन लेग ने 2028 तक "Minimal AGI" आने की संभावना लगभग 50 प्रतिशत बताई है।
  • वहीं Meta के मुख्य AI वैज्ञानिक यान लेकन का मानना है कि मौजूदा AI मॉडल अभी इंसानों जैसी सोच से काफी दूर हैं।

AI की निगरानी के लिए नया वैश्विक ढांचा बनाने की मांग

डेमिस हैसाबिस का मानना है कि AGI जैसी शक्तिशाली तकनीक के लिए केवल तकनीकी विकास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी निगरानी व्यवस्था भी जरूरी होगी।

  • उन्होंने AI कंपनियों की निगरानी के लिए एक अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्था बनाने का सुझाव दिया है।
  • इस संस्था में सरकार, तकनीकी विशेषज्ञ, उद्योग जगत और स्वतंत्र शोधकर्ताओं की भागीदारी हो सकती है।
  • उनका कहना है कि किसी भी अत्याधुनिक AI मॉडल को सार्वजनिक रूप से जारी करने से पहले उसकी सुरक्षा का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
  • इससे AI तकनीक का उपयोग मानव हित में सुनिश्चित किया जा सकेगा।

Artificial General Intelligence (AGI) फिलहाल भविष्य की एक अवधारणा है, लेकिन दुनिया की बड़ी AI कंपनियां और वैज्ञानिक इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। यदि आने वाले वर्षों में AGI वास्तविकता बनता है, तो इसका प्रभाव केवल तकनीक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार और वैश्विक अर्थव्यवस्था समेत लगभग हर क्षेत्र पर दिखाई देगा। ऐसे में AI के विकास के साथ-साथ सुरक्षा, पारदर्शिता और जिम्मेदार उपयोग को प्राथमिकता देना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।