प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य दो वर्षीय डीएलएड (पूर्व में बीटीसी) प्रशिक्षण को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में कई ऐसे अभ्यर्थियों पर गाज गिरी है, जिन्होंने नियमित सरकारी नौकरी में रहते हुए बैकडेट में या उसी अवधि के दौरान डीएलएड/बीटीसी का प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया। व्यापक स्तर पर मिली शिकायतों की जांच के बाद उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) ने नियमों का उल्लंघन करने वाले ऐसे अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त करने की सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
विभिन्न जनपदों से प्राप्त हुई गंभीर शिकायतों की जांच पीएनपी के तत्कालीन सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी के निर्देशन में कराई गई थी। इस जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में पाया गया कि कुछ अभ्यर्थी प्रशिक्षण अवधि के दौरान सरकारी विभागों में पूर्णकालिक और नियमित सेवा दे रहे थे और वहां से वेतन भी उठा रहे थे, जबकि नियमतः डीएलएड/बीटीसी पाठ्यक्रम में शत-प्रतिशत पूर्णकालिक शारीरिक उपस्थिति अनिवार्य होती है। एक ही समय पर दो अलग-अलग स्थानों पर नियमित उपस्थिति दर्ज कराना सीधे तौर पर नियमों और व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है।
जांच के दौरान कई जिलों से इस प्रकार के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। उदाहरण के तौर पर, एटा जिले में एक ऐसा मामला प्रकाश में आया जहां एक अभ्यर्थी वर्ष 2014 बैच के बीटीसी प्रशिक्षण के दौरान बाकायदा लेखपाल के पद पर तैनात था। इसी तरह गाजीपुर जिले में वर्ष 2013 बैच के एक प्रशिक्षणार्थी उसी अवधि में अनुदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। अन्य मामलों में चंदौली के एक अभ्यर्थी ने बीटीसी बैच-2015 के दौरान चिकित्सा विभाग में डाटा ऑपरेटर के पद पर कार्य किया, तो वहीं कौशांबी के एक अभ्यर्थी ने पंचायत सहायक के पद पर तैनात रहते हुए डीएलएड बैच-2022 का नियमित प्रशिक्षण पूरा कर लिया। इनके अलावा मेरठ और कासगंज जैसे अन्य जनपदों से भी ऐसे कई गंभीर प्रकरण पीएनपी की जांच में सही पाए गए हैं।
इस धोखाधड़ी के सामने आने के बाद पीएनपी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषी पाए गए सभी संबंधित अभ्यर्थियों के डीएलएड/बीटीसी प्रमाणपत्रों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है और इसकी आधिकारिक सूचना संबंधित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) और निजी प्रशिक्षण केंद्रों को भेज दी गई है। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, डीएलएड एक पूर्णकालिक और नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसके दौरान किसी भी प्रकार की नियमित नौकरी या कोई अन्य पूर्णकालिक कार्य करना पूरी तरह अमान्य है। पीएनपी की इस कड़ी कार्रवाई को शिक्षक भर्ती और प्रशिक्षण व्यवस्था में शुचिता, पारदर्शिता तथा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक बेहद जरूरी और बड़ा कदम माना जा रहा है।


