प्रयागराज: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) अपने दशकों पुराने नियमों को आधुनिक और लचीला बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तर्ज पर अब यूपी बोर्ड भी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और स्वायत्त संस्थाओं (Autonomous Bodies) को अपने स्कूल संचालित करने की अनुमति देने की तैयारी में है। इस संबंध में यूपी बोर्ड ने मान्यता के नियमों में बड़े संशोधन का एक प्रस्ताव शासन को भेज दिया है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में शिक्षा के स्तर को सुधारना, संस्थागत निवेश को बढ़ावा देना और स्कूल खोलने की प्रक्रिया को 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के तहत बेहद सरल बनाना है।
प्रस्ताव की मुख्य बातें और बड़े बदलाव
यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह की ओर से शासन को भेजे गए इस प्रस्ताव में कई ऐसे बदलाव शामिल किए गए हैं, जो आने वाले समय में यूपी बोर्ड के स्कूलों का ढांचा पूरी तरह बदल सकते हैं। मुख्य बदलाव निम्नलिखित हैं:
- स्वायत्त और सरकारी संस्थाओं को मौका: अब तक यूपी बोर्ड से स्कूल खोलने के लिए मुख्य रूप से सोसायटियों या ट्रस्टों को ही अनुमति मिलती थी। नए प्रस्ताव के तहत अब देश और प्रदेश के बड़े सार्वजनिक उपक्रम (जैसे NTPC, BHEL आदि) और सरकारी स्वायत्त संस्थाएं भी सीधे यूपी बोर्ड से संबद्ध स्कूल खोल और चला सकेंगी।
- जमीन के मानकों में लचीलापन (Relaxation in Land Norms): स्कूल खोलने के लिए जमीन की बाध्यता को लेकर अक्सर विवाद और मुश्किलें आती थीं। नए प्रस्ताव में भूमि संबंधी मानकों को व्यावहारिक और लचीला बनाने की बात कही गई है, ताकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के हिसाब से आसानी से स्कूल खोले जा सकें।
- सालभर खुला रहेगा मान्यता पोर्टल: अब तक मान्यता आवेदन के लिए एक निश्चित समय सीमा तय होती थी। लेकिन नए नियमों के तहत, यदि कोई संस्था सभी जरूरी आवश्यकताओं और मानकों को पूरा करती है, तो वह वर्ष में कभी भी आवेदन कर सकती है। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल को पूरे वर्ष खुला रखने का प्रस्ताव है।
पुराने स्कूलों को मिलेगी बड़ी राहत (रुकी हुई उच्चीकरण प्रक्रिया होगी बहाल)
इस प्रस्ताव में केवल नए स्कूलों के लिए ही नहीं, बल्कि सालों से चल रहे पुराने स्कूलों के लिए भी एक बड़ा राहत भरा फैसला लिया गया है।
दरअसल, पिछले कुछ समय में भूमि संबंधी मानकों में बदलाव (बढ़ोतरी) होने के कारण कई पुराने स्कूलों की उच्चीकरण (Upgradation - जैसे हाईस्कूल से इंटरमीडिएट होना) की प्रक्रिया अटक गई थी। नए प्रस्ताव में कहा गया है कि जिन स्कूलों को पुराने भूमि मानकों के आधार पर पहले ही मान्यता मिल चुकी है, उनकी रुकी हुई उच्चीकरण प्रक्रिया को दोबारा बहाल किया जाएगा। इससे हजारों स्कूलों और वहां पढ़ने वाले लाखों छात्रों को सीधा फायदा होगा।
'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और संस्थागत स्वामित्व पर जोर
यूपी बोर्ड का यह नया रुख पूरी तरह से आधुनिक और कॉर्पोरेट-अनुकूल दृष्टिकोण को दर्शाता है। बोर्ड का मानना है कि:
- संस्थागत स्वामित्व (Corporate Ownership): जब बड़े पीएसयू और प्रतिष्ठित स्वायत्त संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में उतरेंगे, तो स्कूलों को बेहतर फंडिंग, आधुनिक लैब, खेल के मैदान और उच्च स्तरीय बुनियादी ढांचा मिल सकेगा।
- पारदर्शिता और सरलता: पूरे साल पोर्टल खुला रहने और ऑनलाइन प्रक्रिया होने से लालफीताशाही खत्म होगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
निष्कर्ष
यूपी बोर्ड का यह कदम शिक्षा के निजीकरण की दिशा में नहीं, बल्कि "संस्थागत सुदृढ़ीकरण" की दिशा में एक बड़ा सुधार है। अगर शासन से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो आने वाले दिनों में यूपी बोर्ड के स्कूलों में भी केंद्रीय विद्यालयों या सीबीएसई स्कूलों जैसी आधुनिक सुविधाएं देखने को मिल सकती हैं, जिससे राज्य के बच्चों को बेहद कम खर्च पर विश्वस्तरीय शिक्षा मिल सकेगी।


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