देशभर के करीब 25 लाख प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों की सेवा पर गहरा संकट मंडरा रहा है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए 'टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया' (TFI) ने सीधे देश के माननीय प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कानून में संशोधन करने की मांग उठाई है। फेडरेशन ने आग्रह किया है कि संसद के माध्यम से कानून में बदलाव कर 2010 से पहले नियुक्त हुए अनुभवी शिक्षकों को इस संकट से उबारा जाए।
'टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया' के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चन्द्र शर्मा और महासचिव राम मूर्ति ठाकुर द्वारा जारी पत्र के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने 23 अगस्त 2010 को शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता (Minimum Qualification) तय की थी। इस अधिसूचना के पैरा 4 में स्पष्ट प्रावधान किया गया था कि 23-08-2010 से पहले नियुक्त हो चुके शिक्षकों को 'शिक्षक पात्रता परीक्षा' (TET) उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता से मुक्त रखा जाएगा।
परंतु, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपील संख्या 1385/2025 में 1 सितंबर 2025 और 29 मई 2026 को दिए अपने आदेशों में NCTE द्वारा दी गई इस छूट को अमान्य कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के अनुसार, 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी TET उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसा न करने की स्थिति में 1 सितंबर 2028 को इन सभी शिक्षकों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त करने का आदेश दिया गया है, जिसे लेकर शिक्षकों में भारी चिंता है।
"बीच खेल में नहीं बदले जा सकते नियम"
फेडरेशन ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को शिक्षकों के साथ घोर अन्याय बताया है। पत्र में तर्क दिया गया है कि देश के इतिहास में कभी भी किसी विधिक रूप से नियुक्त कर्मचारी को 25 से 30 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद सेवा के मध्य में बने रहने के लिए कोई नई परीक्षा पास करने को बाध्य नहीं किया गया है। देश के सर्वोच्च सेवा संवर्गों जैसे IAS, IPS या राज्य स्तर पर PCS अधिकारियों में भी एक बार चयन के बाद सेवा में बने रहने या पदोन्नति के लिए ऐसी किसी परीक्षा की व्यवस्था नहीं है।
इसी तरह, उच्च शिक्षा में NET और उत्तर प्रदेश में तृतीय श्रेणी पदों के लिए PET जैसे नियम जब भी लागू किए गए, उन्हें पुरानी तारीख से पूर्व-नियुक्त कर्मचारियों पर कभी थोपा नहीं गया। संगठन का कहना है कि जिस प्रकार वकालत के क्षेत्र में LLB की डिग्री और अनुभव के आधार पर वकील सीधे जज या मुख्य न्यायाधीश तक बन सकते हैं, उसी प्रकार 25-30 वर्षों से पढ़ा रहे बीएड/बीटीसी डिग्री धारक अनुभवी शिक्षकों पर अब TET थोपना न्यायसंगत नहीं है। खुद सुप्रीम कोर्ट भी पहले एक आदेश में स्पष्ट कह चुका है कि खेल के नियम बीच में नहीं बदले जाएंगे।
पूर्व शिक्षा मंत्री के बयानों का दिया हवाला
TFI ने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि 2017 में जब निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार (RTE) अधिनियम में संशोधन किया गया था, तब तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संसद में केवल 'प्रोफेशनल ट्रेनिंग' (व्यावसायिक प्रशिक्षण) को पूरा करने की बात कही थी, उसमें कहीं भी TET का जिक्र नहीं था। भारत सरकार द्वारा 3 अगस्त 2017 को जारी पत्र भी केवल प्रोफेशनल ट्रेनिंग के संबंध में था। यही कारण है कि देश की किसी भी राज्य सरकार ने आज तक पुराने शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य करने का कोई शासनादेश जारी नहीं किया था।
फेडरेशन की मुख्य मांग
टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने प्रधानमंत्री से पुरजोर मांग की है कि एनसीटीई (NCTE) की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के पैरा 4 को माननीय संसद द्वारा पारित कराकर शिक्षा के अधिकार अधिनियम में स्थायी रूप से सम्मिलित किया जाए, ताकि देश के 25 लाख अनुभवी शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित रह सके।
इस पत्र की प्रतियां देश के गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी सहित लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई हैं ताकि सदन में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जा सके।



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