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संचारी रोग नियंत्रण अभियान जुलाई 2026: बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी BSA को जारी किए विशेष निर्देश

Sir Ji Ki Pathshala

जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 'विशेष संचारी रोग नियंत्रण और दस्तक अभियान' की तैयारी, बच्चों के स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए कड़े निर्देश

लखनऊ, उत्तर प्रदेश | बरसात के मौसम में तेजी से फैलने वाले वेक्टर जनित रोगों, संक्रामक रोगों (संचारी रोग) और दिमागी बुखार (Encephalitis) के खतरे को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ी पहल की है। राज्य के बेसिक शिक्षा विभाग ने जुलाई 2026 के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है, जिसके माध्यम से प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालयों को स्वास्थ्य सुरक्षा का केंद्र बनाने की तैयारी है।

विशेष संचारी रोग अभियान जुलाई 2026

​शिक्षा निदेशक (बेसिक) द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों के अनुसार, यह अभियान बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा के प्रति शिक्षा विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस संबंध में विभाग द्वारा जारी विस्तृत कार्ययोजना में अभियान की रूपरेखा और विद्यालयों के लिए अनिवार्य दिशानिर्देशों को स्पष्ट किया गया है।

​अभियान की समय-सीमा और उद्देश्य

​जुलाई 2026 के लिए निर्धारित यह अभियान दो प्रमुख चरणों में संचालित होगा:

  • विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान: 01 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक।
  • दस्तक अभियान: 11 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक।

​इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश भर में दिमागी बुखार और अन्य जल-जनित रोगों के प्रसार को रोकना और बच्चों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है।

​विद्यालयों के लिए नई गाइडलाइन्स

​विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों के लिए कुछ कड़े नियम तय किए हैं:

1. बच्चों की सुरक्षा और वेशभूषा:

मच्छरों से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए, शिक्षकों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि सभी छात्र स्कूल में पूरी बाजू की कमीज और फुल लेंथ पैंट पहनकर आएं। विभाग का मानना है कि यूनिफॉर्म का पूर्ण पालन न होने से बच्चों के स्वास्थ्य पर जोखिम बढ़ता है, जिसे तत्काल प्रभाव से सुधारा जाना आवश्यक है।

2. स्वच्छता और सैनिटाइजेशन:

अभियान के तहत स्कूलों में जलभराव की रोकथाम, पानी के टैंकों की सफाई और शौचालयों के स्वच्छता मानकों पर विशेष जोर दिया गया है। छात्रों को भोजन से पहले और शौच के बाद हाथ धोने की अच्छी आदतें सिखाना शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।

3. स्वास्थ्य शिक्षा और अभिभावकों की भूमिका:

विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि जागरूकता का माध्यम भी बनेंगे। शिक्षक अभिभावकों के साथ बैठक करके उन्हें सुरक्षित पेयजल, डायरिया के रोकथाम, और बुखार के शुरुआती लक्षणों को पहचानने के लिए जागरूक करेंगे। इसके लिए वाद-विवाद प्रतियोगिता, पोस्टर मेकिंग और निबंध लेखन जैसी गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

4. आपातकालीन प्रोटोकॉल:

यदि विद्यालय का कोई छात्र बुखार के कारण अनुपस्थित रहता है, तो प्रधानाध्यापक को इसकी सूचना तत्काल संबंधित चिकित्सा अधिकारी या सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी को देनी होगी। इसके अलावा, किसी भी पशु के काटने की स्थिति में प्राथमिक उपचार (15 मिनट तक बहते पानी में घाव धोना) और तुरंत अस्पताल जाने का प्रोटोकॉल भी अनिवार्य कर दिया गया है।

​साप्ताहिक रिपोर्टिंग और जवाबदेही

​यह अभियान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। जनपदों को साप्ताहिक आधार पर कार्य की प्रगति की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग, राज्य मुख्यालय और महानिदेशक स्कूल शिक्षा को उपलब्ध करानी होगी।

​उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग का यह निर्णय न केवल बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य के लिए एक सुरक्षा कवच है, बल्कि समुदाय में स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने का भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

संचारी रोगों से बचाव हेतु विशेष अभियान जुलाई 2026

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