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यूपी शिक्षा विभाग का अजीबोगरीब कारनामा, मौत के 5 साल बाद दो मृत शिक्षिकाओं को बनाया BSA

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यप्रणाली और फाइलों के रख-रखाव पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग ने एक बड़ी लापरवाही करते हुए दो ऐसी शिक्षिकाओं को बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और समकक्ष पदों पर पदोन्नति (प्रमोशन) दे दी, जिनकी मृत्यु आज से 5 साल पहले ही हो चुकी है। यह मामला सामने आने के बाद से ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।

​विभागीय प्रोन्नति समिति (DPC) की बैठक में लगी मुहर

​मिली जानकारी के अनुसार, शिक्षा निदेशालय द्वारा उपलब्ध कराई गई शिक्षकों की वरिष्ठता सूची के आधार पर बीते 16 और 17 अप्रैल को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) में विभागीय प्रोन्नति समिति (DPC) की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में शासन के विशेष सचिव कृष्ण कुमार गुप्ता और तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेन्द्र देव जैसे बड़े अधिकारी स्वयं शामिल थे।

UP Education Department Prayagraj BSA Promotion Case

​इस बैठक में हरी झंडी मिलने के बाद 26 मई को पदोन्नति का आधिकारिक आदेश जारी किया गया। इसके तहत:

  • निरीक्षण शाखा (खंड शिक्षाधिकारी): 164 शिक्षकों को प्रमोट किया गया।
  • शैक्षिक अध्यापन (पुरुष शाखा): 167 शिक्षकों की पदोन्नति हुई।
  • शैक्षिक अध्यापन (महिला शाखा): 159 महिला शिक्षिकाओं को पदोन्नति दी गई।

​इन सभी को बीएसए (BSA), डायट के वरिष्ठ प्रवक्ता, और राजकीय इंटर कॉलेजों के प्रधानाचार्य जैसे समकक्ष पदों पर प्रमोट किया गया था।

​सूची में 19वें और 47वें नंबर पर दर्ज हैं मृत शिक्षिकाओं के नाम

​इस पूरी सूची में सबसे चौंकाने वाली बात महिला शाखा की लिस्ट में देखने को मिली। लिस्ट में दो ऐसी महिला शिक्षिकाओं के नाम शामिल हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं:

  1. सुनील लता (वरिष्ठता क्रमांक संख्या 662): सूची में 19वें स्थान पर दर्ज सुनील लता ने 11 जनवरी 1997 को कार्यभार ग्रहण किया था। उनका निधन कोरोना काल के दौरान 29 अप्रैल 2021 को हो चुका है। वर्तमान में अयोध्या निवासी उनके पति ब्रजेश चन्द्र लाल को नियमानुसार पेंशन भी मिल रही है।
  2. सुमन कुमारी (वरिष्ठता क्रमांक संख्या 696ए): सूची में 47वें स्थान पर दर्ज सुमन कुमारी राजकीय हाईस्कूल अर्न्धरा (हरदोई) में प्रधानाध्यापिका थीं। उनका निधन भी सेवाकाल के दौरान 27 मार्च 2021 को हो गया था। विभाग को उनकी मौत की जानकारी इस कदर थी कि उनके निधन के बाद उनके बेटे जय प्रकाश पाल को मृतक आश्रित कोटे के तहत नौकरी भी दी जा चुकी है।

​इसके बावजूद, इन दोनों के नाम पदोन्नति सूची में शामिल होना यह दर्शाता है कि विभाग ने बिना किसी जमीनी सत्यापन या सर्विस बुक की जांच किए ही फाइलों को आगे बढ़ा दिया।

​दो सप्ताह बाद भी तैनाती अटकी, सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे शिक्षक परेशान

​एक तरफ जहां मृत शिक्षिकाओं के नाम सूची में आने से किरकिरी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ 26 मई को लिस्ट जारी होने के दो सप्ताह बाद भी जीवित अधिकारियों की तैनाती (पोस्टिंग) नहीं हो सकी है। उत्तर प्रदेश शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा समूह ‘ख’ में पदोन्नति पाने वाले कई अधिकारी अपने रिटायरमेंट के बेहद करीब हैं, जिसके चलते वे जल्द से जल्द पोस्टिंग की मांग कर रहे हैं।

​इस बीच, शासन के संयुक्त सचिव वेद प्रकाश राय ने एससीईआरटी (SCERT) लखनऊ के निदेशक को 9 जून को एक पत्र भेजकर खंड शिक्षा अधिकारियों की तैनाती के लिए प्रस्ताव मांगा है। नए नियमों के मुताबिक, प्रमोट हुए बीईओ (BEO) को उनके गृह जनपद या उस जिले में तैनाती नहीं दी जाएगी जहां से उनका प्रमोशन हुआ है।

​आधिकारिक बयान: जांच के बाद होगी सख्त कार्रवाई

​इस गंभीर लापरवाही पर शिक्षा विभाग के आला अधिकारी अब डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। मामले के तूल पकड़ने के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने स्पष्ट किया है: ​"मृत शिक्षिकाओं की पदोन्नति का यह गंभीर मामला हमारे संज्ञान में आया है। इस पूरी चूक की गहन जांच कराई जा रही है और जो भी संबंधित कर्मचारी या अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।"

​अब देखना यह है कि कागजों पर 'मुर्दों' को अफसर बनाने वाले इस सिस्टम के जिम्मेदार चेहरों पर कब तक गाज गिरती है।