देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें इस समय 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और इसकी सिफारिशों पर टिकी हैं। इसी कड़ी में रेलवे सीनियर सिटीजंस वेलफेयर सोसायटी (RSCWS) ने वित्त मंत्रालय और आयोग को एक विस्तृत मेमोरेंडम (ज्ञापन) सौंपा है। इस ज्ञापन में सिर्फ कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि पेंशनर्स की सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा को लेकर कई क्रांतिकारी बदलावों की मांग की गई है।
आइए इस लेख में विस्तार से समझते हैं कि संगठन की मुख्य मांगें क्या हैं और वर्तमान नियमों के आलोक में उनकी सत्यता की स्थिति क्या है।
1. पेंशनर्स के लिए OROP (वन रैंक वन पेंशन) की मांग
RSCWS का तर्क है कि समान पद और समान सेवा अवधि (Length of Service) के बाद रिटायर होने वाले कर्मचारियों की पेंशन में सिर्फ इसलिए अंतर नहीं होना चाहिए क्योंकि उनके रिटायरमेंट की तारीखें अलग-अलग थीं। संगठन ने सैन्य बलों की तर्ज पर सिविलियन पेंशनर्स के लिए भी One Rank One Pension (OROP) जैसी व्यवस्था लागू करने की वकालत की है।
वर्तमान में OROP केवल सशस्त्र बलों (Armed Forces) के लिए लागू है। सिविलियन कर्मचारियों के लिए हर वेतन आयोग में पेंशन को 'पैरिटी' (समानता) फॉर्मूले के तहत संशोधित किया जाता है, लेकिन यह पूरी तरह से OROP नहीं है। सिविलियन पेंशनर्स के लिए इसे लागू करना एक बेहद जटिल और बड़ा वित्तीय निर्णय होगा, जिस पर सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक सहमति नहीं दी है।
2. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
संगठन ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) की जगह पुरानी पेंशन योजना (Defined Benefit Pension Scheme) को बहाल करने की मांग की है। उनका कहना है कि बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा के लिए एक निश्चित और गारंटीड पेंशन बेहद जरूरी है।
केंद्र सरकार ने साफ किया है कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन (OPS) पर लौटने का कोई विचार नहीं है। हालांकि, चौतरफा दबाव के बाद सरकार ने एनपीएस में सुधार करते हुए यूपीएस (Unified Pension Scheme - UPS) को मंजूरी दी है, जो कर्मचारियों को 50% एश्योर्ड पेंशन की गारंटी देती है। इसलिए, 8वें वेतन आयोग में पूरी तरह से OPS की वापसी की संभावना न के बराबर है, लेकिन UPS के प्रावधानों को और बेहतर बनाने पर चर्चा हो सकती है।
3. 70 वर्ष की उम्र से मिले अतिरिक्त पेंशन का लाभ
वर्तमान नियमों के अनुसार, पेंशनभोगियों को 80 वर्ष की आयु पूरी करने पर 20% अतिरिक्त पेंशन (Dearness Allowance के साथ) मिलती है। RSCWS का सुझाव है कि बढ़ती उम्र के साथ चिकित्सा और देखभाल का खर्च 70 साल के बाद ही तेजी से बढ़ने लगता है। इसलिए, अतिरिक्त पेंशन की शुरुआत 70 वर्ष की आयु से ही हो जानी चाहिए और इसे चरणों में (जैसे 70, 75, 80 वर्ष पर) बढ़ाया जाना चाहिए।
संसदीय समितियों (Parliamentary Standing Committees) ने भी पूर्व में सरकार को यह सिफारिश की थी कि अतिरिक्त पेंशन की शुरुआती उम्र 80 से घटाकर 65 या 70 वर्ष की जानी चाहिए। हालांकि, वित्तीय भार को देखते हुए वित्त मंत्रालय ने अभी तक इस पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है। 8वें वेतन आयोग के सामने यह एक बेहद मजबूत और तार्किक मांग के रूप में प्रस्तुत की गई है।
4. महंगाई के साथ स्वतः पेंशन संशोधन (Automatic Revision)
ज्ञापन में कहा गया है कि पेंशनर्स की आय महंगाई की तुलना में स्थिर हो जाती है। इसलिए केवल साल में दो बार मिलने वाले महंगाई भत्ते (DA/DR) के भरोसे रहने के बजाय, पेंशन संशोधन की एक ऐसी स्वचालित व्यवस्था होनी चाहिए जो समय-समय पर महंगाई और जीवन स्तर के अनुसार अपने-आप अपडेट होती रहे।
वर्तमान में हर 10 साल में गठित होने वाला वेतन आयोग ही मूल पेंशन (Basic Pension) को संशोधित करता है। स्वतः संशोधन (Automatic Pay/Pension Revision) का विचार 7वें वेतन आयोग ने भी दिया था (यदि डीए 50% पार कर जाए), लेकिन इसे आधिकारिक तौर पर पूरी तरह लागू नहीं किया गया। 8वां आयोग इस पर विचार कर सकता है।
5. मेडिकल सुविधाओं और भत्तों में सुधार
रेलवे स्वास्थ्य सेवाओं और CGHS (केंद्रीय सरकारी स्वास्थ्य योजना) में बड़े सुधार, कैशलेस इलाज के दायरे का विस्तार, और दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) को बढ़ाने की मांग की गई है।
यह मांग पूरी तरह व्यावहारिक है। वर्तमान में मिलने वाला 1,000 रुपये का मासिक मेडिकल अलाउंस (FMA) आज के महंगे इलाज के दौर में बेहद कम है। कर्मचारी संगठन इसे बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह करने की मांग लंबे समय से कर रहे हैं, जिसे 8वें वेतन आयोग द्वारा स्वीकार किए जाने की प्रबल संभावना है।
क्या उम्मीदें पूरी होंगी?
रेलवे सीनियर सिटीजंस वेलफेयर सोसायटी द्वारा सौंपे गए मेमोरेंडम ने पेंशनर्स की वास्तविक व्यावहारिक समस्याओं को उजागर किया है।
तथ्य यह है कि वेतन आयोग एक स्वायत्त संस्था के रूप में इन सभी मांगों, सरकारी खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ और देश की आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन करेगी। जहां मेडिकल अलाउंस और 70 या 75 वर्ष की उम्र से चरणबद्ध तरीके से अतिरिक्त पेंशन देने जैसी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार हो सकता है, वहीं हूबहू OPS की वापसी या पूर्ण OROP लागू करना सरकार के लिए एक कठिन आर्थिक चुनौती होगी।


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