नई दिल्ली। नया आयकर रिटर्न (ITR) सत्र शुरू होते ही नौकरीपेशा (वेतनभोगी) कर्मचारियों के बीच जल्द से जल्द रिटर्न दाखिल करने की होड़ मच जाती है। कई लोगों को लगता है कि जितनी जल्दी वे रिटर्न भरेंगे, उनका टैक्स रिफंड भी उतनी ही तेजी से वापस आएगा। हालांकि, टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि यह जल्दबाजी फायदे की जगह भारी नुकसान पहुंचा सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि नौकरीपेशा लोग हमेशा फॉर्म-16 मिलने के बाद ही अपना रिटर्न दाखिल करें और इसके लिए उन्हें 15 जून तक का इंतजार करना चाहिए।
क्यों करना होगा 15 जून तक का इंतजार?
देश की सभी कंपनियों और नियोक्ताओं (Employers) के लिए यह नियम है कि उन्हें बीते वित्तीय वर्ष की आखिरी तिमाही का टीडीएस (TDS) रिटर्न 31 मई तक सरकार के पास जमा करना होता है। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही कंपनियां अपने कर्मचारियों को फॉर्म-16 जारी कर पाती हैं। इस बार भी यह पूरी प्रक्रिया 15 जून तक पूरी होने की उम्मीद है, इसलिए नियोक्ताओं द्वारा इसी तारीख के आसपास फॉर्म-16 जारी किए जाएंगे।
जल्दबाजी में रिटर्न भरने के नुकसान
- वेतन स्लिप (Salary Slip) से रिटर्न भरना ठीक नहीं: यदि आप फॉर्म-16 मिलने से पहले केवल सैलरी स्लिप या अनुमान के आधार पर रिटर्न भरते हैं, तो वास्तविक आंकड़ों में अंतर आने की पूरी संभावना रहती है। इससे रिटर्न गलत होने का खतरा रहता है और आपको दोबारा संशोधित रिटर्न (Revised Return) दाखिल करना पड़ सकता है।
- मिसमैच और नोटिस का खतरा: 15 जून से पहले फॉर्म 26AS और एआईएस (AIS) जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज पूरी तरह अपडेट नहीं होते हैं। यदि आपके द्वारा दी गई जानकारी और आयकर विभाग के रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है, तो आपका रिफंड अटक सकता है। इतना ही नहीं, विभाग की ओर से स्पष्टीकरण या इनकम टैक्स का नोटिस भी भेजा जा सकता है।
क्या है फॉर्म-16 और क्यों है यह जरूरी?
यह नियोक्ता (कंपनी) की तरफ से कर्मचारियों को दिया जाने वाला एक प्रमाण पत्र है, जिसमें कर्मचारी के वेतन और स्रोत पर की गई टैक्स कटौती (TDS) की पूरी जानकारी होती है। यह दो हिस्सों में बंटा होता है:
- पार्ट-ए: इसमें नियोक्ता द्वारा काटी गई और सरकारी खाते में जमा की गई तिमाही टैक्स कटौती की जानकारी होती है। साथ ही इसमें नियोक्ता का टैन (TAN) और पैन (PAN) नंबर दर्ज होता है।
- पार्ट-बी: इसमें वेतन का विस्तृत विवरण, आयकर कानून के तहत मिली छूट (जैसे- एचआरए, धारा 80C और 80D के तहत कटौती, जीवन बीमा, पीपीएफ आदि) की पूरी जानकारी शामिल होती है।
आईटीआर (ITR) दाखिल करने का सही समय
टैक्स मामलों के जानकारों के अनुसार, 15 जून के बाद ही आईटीआर दाखिल करना सबसे अधिक सुरक्षित माना जाता है। इस समय तक फॉर्म-16, एआईएस (AIS), टीआईएस (TIS) और फॉर्म 26AS जैसे सभी आवश्यक दस्तावेज आयकर विभाग के पोर्टल पर अपडेट हो जाते हैं। इसलिए, जून के दूसरे पखवाड़े (15 जून के बाद) से लेकर जुलाई के मध्य तक का समय रिटर्न दाखिल करने के लिए सबसे बेहतर और सटीक रहता है।
फॉर्म-16 के अलावा ये दस्तावेज भी हैं बेहद जरूरी
- फॉर्म 26एस (Form 26AS) और एआईएस (AIS): एआईएस (वार्षिक सूचना विवरण) में आपके बैंक खाते, शेयर, ब्याज और म्यूचुअल फंड निवेश से होने वाली आय की पूरी जानकारी होती है, जिससे टैक्स की सही पुष्टि होती है।
- पासबुक और ब्याज का प्रमाण-पत्र: एफडी (FD) या बचत खाते से मिलने वाले ब्याज को भी अपनी आय में शामिल करना अनिवार्य है। इसके लिए बैंक स्टेटमेंट की जांच जरूर करें।
- वेतन स्लिप (Salary Slip): मूल वेतन, मकान किराया भत्ता (HRA) और अन्य कटौतियों के सही मिलान के लिए सैलरी स्लिप सहायक होती है।
रिटर्न दाखिल करने से पहले फॉर्म-16, फॉर्म 26AS और एआईएस का आपस में मिलान (Reconciliation) अवश्य करें। कोई भी आय छुपाने या अधूरी जानकारी देने से बचें और रिटर्न भरने के बाद समय पर ई-सत्यापन (e-Verification) करना न भूलें।


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