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School Merger Case: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रखा बरकरार, एसएलपी (SLP) खारिज

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में स्कूलों के 'मर्जर' (विलय) या 'पेयरिंग' की प्रक्रिया को लेकर चल रहे लंबे विवाद पर अब कानूनी मुहर लग गई है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ खंडपीठ) के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट का क्या रहा रुख?

​माननीय न्यायमूर्ति श्री दीपांकर दत्ता और माननीय न्यायमूर्ति श्री सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने 'मास्टर नितेश कुमार एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' मामले (SLP No. 9690/2026) की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि वे हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने के इच्छुक नहीं हैं। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा: ​

"हम हाईकोर्ट के आक्षेपित निर्णय और आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं; अतः विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज की जाती है।"

Supreme Court Order on School Merger

​इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश माननीय अरुण भंसाली और माननीय जसप्रीत सिंह की पीठ ने पूर्व में स्कूलों की पेयरिंग (Pairing) को लेकर कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिन्हें अब सर्वोच्च न्यायालय ने भी अंतिम माना है:

  • RTE एक्ट का पालन अनिवार्य: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्कूलों का विलय या पेयरिंग शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) और संविधान के अनुच्छेद 21-A के प्रावधानों के उल्लंघन में नहीं हो सकता।
  • दूरी और छात्र संख्या के मानक: * केवल उन्हीं स्कूलों की पेयरिंग की जा सकती है जहाँ छात्र संख्या 50 से कम है।
    • ​प्राथमिक विद्यालयों के लिए दूरी 1 किमी के भीतर और उच्च प्राथमिक (जूनियर) के लिए यह दायरा निर्धारित मानकों के अधीन होना चाहिए।
  • अन-पेयरिंग (Un-pairing) के निर्देश: यदि किसी स्कूल में छात्रों की संख्या 50 से अधिक है और दूरी 1 किमी से ज्यादा है, तो उन्हें पेयर नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में विभाग को उन्हें 'अन-पेयर' करने के निर्देश दिए गए थे।

क्या होगा इस फैसले का असर?

​इस कानूनी मुहर के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग केवल उन्हीं विद्यालयों का विलय या पेयरिंग कर सकेगा जो RTE एक्ट और कोर्ट द्वारा तय किए गए मानकों को पूरा करते हैं। शेष विद्यालयों को बिना नियमों में बदलाव किए छुआ नहीं जा सकेगा।

मुख्य निष्कर्ष:

  1. मर्जर को सशर्त सही माना गया है: मर्जर पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन यह केवल निर्धारित दूरी (1 किमी) और कम छात्र संख्या (50 से कम) वाले स्कूलों तक ही सीमित रहेगा।
  2. विभाग को निर्देश: कोर्ट ने विभाग को आदेश दिया है कि भविष्य में स्कूलों की पेयरिंग करते समय 27.08.2025 के शासनादेश और कोर्ट द्वारा तय गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन किया जाए।

​इस फैसले से उन अभिभावकों और शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है जो नियमों के विरुद्ध जाकर किए जा रहे स्कूलों के मर्जर का विरोध कर रहे थे। अब यह स्पष्ट है कि बिना RTE एक्ट के मानकों को पूरा किए किसी भी विद्यालय के अस्तित्व या उसकी भौगोलिक स्थिति से छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी।

हाईकोर्ट का वह आदेश, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सही माना 👇



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