नई दिल्ली/लखनऊ: शिक्षकों की योग्यता और नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से चल रहा कानूनी विवाद अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) द्वारा टीईटी (TET) की अनिवार्यता को लेकर दिए गए पिछले फैसले के विरुद्ध दायर की गई सभी पुनर्विचार याचिकाओं (Review Petitions) पर सुनवाई के लिए 24 अप्रैल, 2026 की तारीख मुस्तैद की गई है।
इस सुनवाई पर उत्तर प्रदेश सहित देश भर के हजारों शिक्षकों और अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हुई हैं, जिनका भविष्य इस अदालती फैसले के साथ प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है।
मामले का मुख्य विवरण
हाल ही में प्राप्त कोर्ट अपडेट और यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा), उत्तर प्रदेश द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस मामले का विवरण निम्नलिखित है:
- डायरी नंबर: 1576/2026
- सुनवाई की संभावित तिथि: 24 अप्रैल, 2026 (कंप्यूटर जनरेटेड)
- याचिकाकर्ता: अमित कुमार सिंह एवं अन्य
- प्रतिवादी: उत्तर प्रदेश सरकार/महाराष्ट्र राज्य (विभिन्न याचिकाओं के संदर्भ में)
- प्रमुख अधिवक्ता: विक्रम हेगड़े
क्या है पूरा विवाद?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व के आदेशों में शिक्षक बनने के लिए Teacher Eligibility Test (TET) को अनिवार्य माना था। इस फैसले से उन शिक्षकों के सामने संकट खड़ा हो गया था जिनकी नियुक्तियां पुराने नियमों के आधार पर हुई थीं या जो कुछ विशेष छूट की उम्मीद कर रहे थे। इसी आदेश को चुनौती देते हुए शिक्षकों के विभिन्न संगठनों और प्रभावित अभ्यर्थियों ने पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की थीं।
शिक्षक संघों की सक्रियता
यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (UTA) इस मामले में शुरू से ही शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रख रहा है। यूटा उत्तर प्रदेश का मानना है कि इस सुनवाई के माध्यम से शिक्षकों को राहत मिलने की पूरी संभावना है। संघ का कहना है कि वे कानूनी रूप से यह साबित करने का प्रयास करेंगे कि किस प्रकार कुछ परिस्थितियों में पुरानी नियुक्तियों को इस दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए।



