लखनऊ। उत्तर प्रदेश शिक्षा निदेशालय (बेसिक) ने राज्य के सभी जिलों में स्कूल सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विभाग ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन दिशा-निर्देशों के तहत 'स्कूल सुरक्षा नीति-2016' के क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति जानने के लिए सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) से तिमाही प्रगति रिपोर्ट (Quarterly Progress Report - QPR) मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन
यह कदम माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी उन निर्देशों के क्रम में उठाया गया है, जिनमें स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल परिसर किसी भी प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हों।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार, सभी जिलों को निम्नलिखित निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है:
- तिमाही अवधि: रिपोर्ट मुख्य रूप से जनवरी, फरवरी और मार्च 2026 की अवधि के लिए मांगी गई है।
- डिजिटल और हार्ड कॉपी: डेटा को पारदर्शिता और तेजी से संकलित करने के लिए एक विशेष Google Sheet लिंक जारी किया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जानकारी ऑनलाइन भरने के साथ-साथ इसकी हार्ड कॉपी भी निदेशालय को उपलब्ध कराएं।
- समय सीमा: पत्र में 'समयबद्ध' और 'महत्वपूर्ण' की श्रेणी अंकित की गई है, जिसका अर्थ है कि इसमें किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार्य नहीं होगी ताकि भारत सरकार को समय पर रिपोर्ट भेजी जा सके।
क्या है स्कूल सुरक्षा नीति-2016?
स्कूल सुरक्षा नीति-2016 आपदा प्रबंधन के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करती है। इसके तहत स्कूलों में:
- अग्नि सुरक्षा यंत्रों की उपलब्धता।
- भूकंप रोधी संरचनात्मक सुरक्षा।
- आकस्मिक निकासी योजना (Evacuation Plan)।
- छात्रों और शिक्षकों के लिए आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण।
- नियमित रूप से 'मॉक ड्रिल' का आयोजन।


Social Plugin