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RTE एक्ट से पहले नियुक्त शिक्षकों के भाग्य का फैसला आज: दोपहर 1.40 बजे सुप्रीम कोर्ट में 'पुनर्विचार याचिका' पर बड़ी सुनवाई

शिक्षा जगत और हजारों शिक्षकों की निगाहें आज देश की सर्वोच्च अदालत पर टिकी हैं। राइट टू एजुकेशन (RTE) एक्ट के लागू होने से पहले नियुक्त किए गए शिक्षकों (Pre-RTE Teachers) की योग्यता और सेवा शर्तों को लेकर आज दोपहर 1.40 बजे एक अत्यंत महत्वपूर्ण पुनर्विचार याचिका (Review Petition) पर सुनवाई होनी है।

Supreme Court hearing for Pre-RTE Act teachers eligibility case

​यह सुनवाई न केवल हजारों शिक्षकों के करियर का भविष्य तय करेगी, बल्कि शिक्षा के अधिकार कानून के दायरे और उसकी व्याख्या को लेकर भी नई स्थिति स्पष्ट करेगी।

क्या है पूरा विवाद?

​विवाद की जड़ में वह समय है जब RTE एक्ट, 2009 पूरे देश में प्रभावी हुआ था। इस कानून ने शिक्षकों के लिए कुछ अनिवार्य योग्यताएं (जैसे TET/B.Ed/D.El.Ed) निर्धारित की थीं।

  • शिक्षकों का पक्ष: जो शिक्षक इस कानून के आने से पहले ही सेवा में थे, उनका तर्क है कि उन पर बाद में बने नियम पूर्वव्यापी (Retrospectively) प्रभाव से लागू नहीं होने चाहिए।
  • कानूनी पेच: पूर्व के कुछ फैसलों में अदालत ने योग्यता मानकों को अनिवार्य बताया था, जिसके बाद कई शिक्षकों की नियुक्तियों पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। इसी फैसले को चुनौती देते हुए अब पुनर्विचार याचिका दायर की गई है।

आज की सुनवाई के मुख्य बिंदु

​आज दोपहर 1.40 बजे होने वाली इस विशेष सुनवाई में निम्नलिखित पहलुओं पर चर्चा होने की उम्मीद है:

  1. अनुभव बनाम पात्रता: क्या दशकों का शिक्षण अनुभव RTE के तहत अनिवार्य की गई नई शैक्षणिक योग्यताओं का विकल्प हो सकता है?
  2. सुरक्षित सेवा शर्तें: क्या सरकार उन शिक्षकों को सेवा से हटा सकती है या उनके वेतनमान में कटौती कर सकती है जिन्होंने कानून आने से पहले ही अपनी सेवा शुरू कर दी थी?
  3. संवैधानिक प्रावधान: क्या RTE एक्ट के प्रावधानों को पिछली तारीख से लागू करना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है?

हजारों परिवारों पर सीधा असर

​यह मामला केवल कानूनी दांव-पेच तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं जो 2010 से पहले नियुक्त हुए थे। यदि कोर्ट का रुख सख्त रहता है, तो उनकी नौकरियों पर तलवार लटक सकती है। वहीं, यदि कोर्ट राहत प्रदान करता है, तो यह 'Pre-RTE' शिक्षकों के लिए एक ऐतिहासिक जीत होगी।

आगे क्या?

​दोपहर 1.40 बजे शुरू होने वाली यह कार्यवाही संक्षिप्त लेकिन निर्णायक हो सकती है। कोर्ट या तो याचिका को स्वीकार कर विस्तृत सुनवाई के लिए नई तारीख दे सकता है, या तत्काल प्रभाव से अपना आदेश सुनाकर संशय की स्थिति को समाप्त कर सकता है।

विशेष नोट: इस मामले से जुड़े सभी शिक्षक संघ और अभ्यर्थी सोशल मीडिया और न्यूज़ पोर्टल्स के माध्यम से पल-पल की अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं।

शिक्षण जगत की इस बड़ी खबर पर विस्तृत कवरेज जारी है।