कानपुर। आगामी जनगणना 2027 को सुचारू और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए कानपुर प्रशासन ने कमर कस ली है। हाल ही में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की जनगणना कार्यों में ड्यूटी लगाई गई थी, जिसके बाद प्रशासन के पास बड़ी संख्या में ड्यूटी से छूट के आवेदन पहुंचने लगे हैं। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर ड्यूटी कटवाने की इस 'होड़' को देखते हुए ज़िला प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है।
मेडिकल बोर्ड करेगा दावों की पुष्टि
अपर ज़िलाधिकारी (वि०/रा०) और ज़िला जनगणना अधिकारी, कानपुर नगर द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, अब किसी भी कर्मचारी को केवल प्रार्थना पत्र के आधार पर ड्यूटी से राहत नहीं मिलेगी। प्रशासन ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को पत्र लिखकर एक समर्पित मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया है।
जांच के मुख्य बिंदु:
- प्रमाण पत्रों का सत्यापन: कर्मचारी द्वारा प्रस्तुत किए गए सभी मेडिकल दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जाएगी।
- कार्यक्षमता का आकलन: मेडिकल बोर्ड स्पष्ट रूप से यह प्रमाणित करेगा कि संबंधित कर्मचारी अपनी बीमारी के आधार पर सरकारी सेवा (जनगणना कार्य) करने में सक्षम है या नहीं।
- फर्जीवाड़े पर रोक: इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन कर्मचारियों की पहचान करना है जो बिना किसी गंभीर बीमारी के केवल कार्य से बचने के लिए मेडिकल लीव का सहारा ले रहे हैं।
प्रशासनिक सख्ती
ज़िला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य है और इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पत्र की प्रतिलिपि ज़िलाधिकारी, नगर आयुक्त, मुख्य विकास अधिकारी और बेसिक शिक्षा अधिकारी सहित सभी संबंधित विभागों को भेज दी गई है ताकि प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बनी रहे।
इस आदेश के बाद उन कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है जिन्होंने मामूली स्वास्थ्य समस्याओं या निजी कारणों को बीमारी का रूप देकर आवेदन किया था। अब केवल वही कर्मचारी ड्यूटी से बच पाएंगे जिनकी स्वास्थ्य स्थिति वास्तव में गंभीर होगी।


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