भारत की आन-बान और शान का प्रतीक 'वन्दे मातरम्' अब नए और सुव्यवस्थित प्रोटोकॉल के साथ गूंजेगा। हालिया दिशा-निर्देशों के अनुसार, राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान प्रकट करने और इसके सामूहिक गायन को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा को और अधिक सशक्त बनाना है।
क्या है नया प्रोटोकॉल?
नए नियमों के तहत अब राष्ट्रीय गीत के गायन की अवधि और स्थिति को स्पष्ट किया गया है:
- क्रम: अब किसी भी औपचारिक कार्यक्रम में राष्ट्रगान (Jana Gana Mana) से पहले राष्ट्रीय गीत (Vande Mataram) गाया या बजाया जाएगा।
- गायन की अवधि: अब राष्ट्रीय गीत के पूरे 6 पैराग्राफ सामूहिक रूप से गाए जाएंगे। इसकी कुल अवधि 3 मिनट 10 सेकंड (190 सेकंड) निर्धारित की गई है।
- सावधान की मुद्रा: जिस तरह राष्ट्रगान के समय सभी नागरिक सम्मान में स्थिर खड़े होते हैं, अब राष्ट्रीय गीत के दौरान भी लोगों को 'सावधान' की मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा।
कब-कब गाया जाएगा राष्ट्रीय गीत?
प्रोटोकॉल में उन अवसरों की सूची भी दी गई है जहाँ राष्ट्रीय गीत का गायन किया जाएगा:
- राष्ट्रीय ध्वज और परेड: परेड में राष्ट्रीय ध्वज लाते समय और तिरंगा फहराते समय।
- संवैधानिक गरिमा: राष्ट्रपति के किसी कार्यक्रम में पहुँचने पर, उनके संबोधन से पहले और बाद में।
- राज्यों के कार्यक्रम: राज्यपाल या उपराज्यपाल के समारोहों में और उनके भाषण के पहले व बाद में।
- सम्मान समारोह: नागरिक पुरस्कार वितरण समारोह (जैसे भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री)।
- शैक्षणिक संस्थान: स्कूलों में दैनिक कामकाज या कक्षाएं शुरू होने से पहले।
महत्वपूर्ण नोट: राष्ट्रीय गीत 'वन्दे मातरम्' को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने रचा था और इसे भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में एक प्रेरणापुंज माना जाता है। नए नियमों का पालन करना हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।


