नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सम्मान और प्रसार को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों के आयोजनों और औपचारिक समारोहों में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य कर दिया गया है।
इस निर्णय का सबसे प्रमुख पहलू यह है कि अब गीत के संक्षिप्त रूप के बजाय इसके पूर्ण संस्करण को अपनाया जाएगा।
प्रमुख बदलाव और नए नियम
सरकार द्वारा जारी आदेश में राष्ट्रगीत के गायन को लेकर स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किए गए हैं:
- खड़े होना अनिवार्य: राष्ट्रगीत बजने या गाए जाने के दौरान वहां उपस्थित सभी व्यक्तियों को सम्मान में खड़ा होना होगा।
- समय सीमा: अब तक केवल पहले दो पैराग्राफ ही गाए जाते थे, लेकिन अब सभी 6 पैराग्राफ बजाए जाएंगे। इसकी कुल अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड होगी।
- मूल स्वरूप का संरक्षण: पूर्ण संस्करण में मां दुर्गा, लक्ष्मी (कमला) और सरस्वती (वाणी) का उल्लेख है। सरकार का तर्क है कि गीत की मूल भावना और ऐतिहासिक अखंडता को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है।
सांस्कृतिक और संवैधानिक महत्व
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का मुख्य नारा रहा है। पूर्ण संस्करण को अनिवार्य बनाकर सरकार इस गीत के उस वैभव को वापस लाना चाहती है, जो आजादी की लड़ाई के दौरान क्रांतिकारियों में जोश भरता था।
नए नियमों के लागू होने के बाद अब सरकारी प्रोटोकॉल की रूपरेखा में बड़ा बदलाव आएगा, जिससे कार्यक्रमों की शुरुआत या समापन और भी गरिमामय होगा।
‘वंदे मातरम’ का पूर्ण पाठ (6 पैराग्राफ)
- वन्दे मातरम्। सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्, शस्यश्यामलां मातरम्। वन्दे मातरम्॥
- शुभ्रज्योत्स्ना पुलकित यामिनीम्, फुल्लकुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्, सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्, सुखदां वरदां मातरम्। वन्दे मातरम्॥
- सप्तकोटि कण्ठ कलकल निनाद कराले, द्विसप्तकोटि भुजैर्धृत खरकरवाले, अबला केनो मा एतो बले? बहुबल धारिणीं नमामि तारिणीं, रिपुदलवारिणीं मातरम्। वन्दे मातरम्॥
- त्वं हि विद्या, त्वं हि धर्म, त्वं हि हृदि, त्वं हि मर्म, त्वं हि प्राणा शरीरे। बाहुते त्वं मा शक्ति, हृदये त्वं मा भक्ति, तोमारई प्रतिमा गढ़ि मन्दिरे-मन्दिरे। वन्दे मातरम्॥
- त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी, कमला कमलदलविहारिणी, वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्। नमामि कमलाम्, अमलाम्, अतुलाम्, सुजलां सुफलां मातरम्। वन्दे मातरम्॥
- श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्, धरणीं भरणीं मातरम्। वन्दे मातरम्॥


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