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शिक्षक भर्ती की आस हुई धुंधली: डीएलएड की 66% सीटें रह गईं खाली, संकट में भविष्य?

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक बनने की अनिवार्य योग्यता, डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) 2025 सत्र के लिए रुझान बेहद निराशाजनक रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्राथमिक भर्ती से बीएड (B.Ed) को बाहर किए जाने के बावजूद, डीएलएड की सीटों का न भर पाना शिक्षा जगत के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

up d.el.ed. vacant seats 2025

दूसरे चरण के बाद भी आंकड़े निराशजनक

​परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को दूसरे चरण की प्रवेश प्रक्रिया समाप्त होने के बाद चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं:

  • कुल उपलब्ध सीटें: 2,39,500
  • कुल प्रवेश: 82,095
  • रिक्त सीटें: 1,57,405 (लगभग 66%)

​अभ्यर्थियों के पास अब 23 फरवरी तक ऑनलाइन रिपोर्ट लॉक करने का समय है, जिसके बाद 24 फरवरी से आधिकारिक रूप से प्रशिक्षण (सत्र) का आगाज़ हो जाएगा।

क्यों टूट रहा है युवाओं का मोह?

​विशेषज्ञों और छात्रों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं:

  1. भर्ती का सूखा: प्रदेश में पिछले कई वर्षों से प्राथमिक शिक्षकों की कोई बड़ी भर्ती नहीं आई है। छात्र केवल डिग्री लेकर घर बैठने के बजाय अन्य विकल्पों की ओर देख रहे हैं।
  2. सरकारी बनाम निजी कॉलेज: कुल प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों में से अधिकांश ने सरकारी डायट (DIET) को प्राथमिकता दी है, जबकि निजी कॉलेजों (Private Colleges) में सन्नाटा पसरा हुआ है।
  3. बाहरी राज्यों के प्रवेश का बेअसर होना: दो साल पहले उत्तर प्रदेश ने दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए भी प्रवेश के दरवाजे खोले थे, लेकिन यह कदम भी सीटों को भरने में नाकाम साबित हुआ।
निष्कर्ष: यदि सरकार जल्द ही नई शिक्षक भर्ती की घोषणा नहीं करती है, तो डीएलएड जैसे व्यावसायिक कोर्स का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। केवल नियम बदलने (जैसे बीएड को बाहर करना) से काम नहीं चलेगा, जब तक धरातल पर नियुक्तियां नहीं दिखेंगी।

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