लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी बजट सत्र से पहले शिक्षा विभाग ने अपनी कमर कस ली है। प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक और परिणामोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने विभागीय उच्चाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मुख्य केंद्र आगामी बजट में शिक्षा से जुड़े नवाचारों और महत्वपूर्ण योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन रहा।
- विभागीय योजनाओं की समीक्षा: 'कायाकल्प' योजना के तहत स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार और डिजिटल लर्निंग की प्रगति को परखा गया।
- नवाचारों पर जोर: शिक्षा में तकनीक के समावेश और नए शैक्षणिक प्रयोगों (Innovations) को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए रोडमैप तैयार किया गया।
- बजट सत्र की तैयारी: सदन में शिक्षा से जुड़े सवालों और प्रस्तावों पर सार्थक चर्चा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को ठोस डेटा और प्रगति रिपोर्ट के साथ तैयार रहने के निर्देश दिए गए।
- समावेशी शिक्षा: समाज के हर वर्ग के बच्चों तक समान रूप से शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विशेष कार्ययोजना पर चर्चा हुई।
- डिजिटल क्लासरूम: प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट बनाने के लिए फंड में बढ़ोतरी।
- शिक्षक प्रशिक्षण: शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण विधियों में प्रशिक्षित करने के लिए नए कार्यक्रम।
- लर्निंग आउटकम: छात्रों के सीखने की क्षमता को मापने के लिए नए मूल्यांकन टूल्स की शुरुआत।
"हम प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण और नवाचार आधारित शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं। हमारा संकल्प हर बच्चे को बेहतर भविष्य देना है।" — संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा मंत्री
क्या हो सकते हैं आगामी बजट के बड़े ऐलान?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार के बजट में बेसिक शिक्षा विभाग को भारी-भरकम आवंटन मिल सकता है। बैठक के संकेतों को देखें तो कुछ प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस रहने की उम्मीद है:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेसिक शिक्षा विभाग जिस 'दृढ़ संकल्प' की बात कर रहा है, उसका असली चेहरा आगामी बजट सत्र में देखने को मिलेगा। मंत्री संदीप सिंह की यह सक्रियता दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश अपनी शिक्षा नीति को 'मिशन मोड' में आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।


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