UP अनुदेशकों की महाजीत: सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, ₹17,000 मानदेय और 7 साल का एरियर देने का आदेश
न्याय की चौखट पर मिली बड़ी जीत
उत्तर प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 25,000 अंशकालिक अनुदेशकों के लिए आज का दिन खुशियों की सौगात लेकर आया है। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया है कि अनुदेशकों को ₹17,000 प्रतिमाह की दर से मानदेय का भुगतान किया जाए। यह फैसला न केवल उनके भविष्य को सुरक्षित करता है, बल्कि वर्षों से चल रही कानूनी लड़ाई पर न्याय की मुहर भी लगाता है।
2017 से मिलेगा बकाया एरियर का भुगतान
अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह वृद्धि केवल वर्तमान से लागू नहीं होगी, बल्कि वर्ष 2017 से लेकर अब तक का पूरा बकाया (एरियर) अनुदेशकों को दिया जाएगा।
- बकाया अवधि: मार्च 2017 से वर्तमान तक।
- किसे मिलेगा लाभ: प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत सभी पात्र अनुदेशक।
संघर्ष की कहानी: 8,470 से 17,000 तक का सफर
अनुदेशक लंबे समय से अल्प मानदेय (₹8,470) पर काम करने को मजबूर थे, जबकि केंद्र सरकार ने 2017 में ही उनके लिए ₹17,000 के मानदेय को मंजूरी दे दी थी। राज्य सरकार द्वारा इसे लागू न किए जाने के खिलाफ अनुदेशकों ने पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। आज के फैसले ने यह साफ कर दिया है कि कर्मचारियों के हक को और अधिक समय तक नहीं रोका जा सकता।
अनुदेशकों में हर्ष की लहर
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रदेश भर के अनुदेशकों में उत्साह का माहौल है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक "धन्यवाद सुप्रीम कोर्ट" के संदेश साझा किए जा रहे हैं। अनुदेशकों का कहना है कि यह उनकी एकता और सत्य की जीत है।
मुख्य बिंदु एक नज़र में:
- लाभार्थी: 25,000 अनुदेशक।
- नया मानदेय: ₹17,000 प्रतिमाह।
- एरियर: वर्ष 2017 से अब तक का पूरा भुगतान।
- कोर्ट का रुख: मानदेय बढ़ाना अनुदेशकों का कानूनी अधिकार।


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