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टीईटी अनिवार्यता बरकरार, सामूहिक छूट की कोई योजना नहीं - संसद में केंद्र सरकार ने दी जानकारी

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि टीईटी न्यूनतम अनिवार्य योग्यता बनी रहेगी। सरकार के इस रुख के बाद 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को सामूहिक छूट मिलने की उम्मीद को बड़ा झटका लगा है।

संसद में साफ: TET अनिवार्यता जारी, छूट नहीं

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने सदन में बताया कि Right of Children to Free and Compulsory Education Act (आरटीई), 2009 की धारा 23 के तहत National Council for Teacher Education (एनसीटीई) ने 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के माध्यम से कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया है।

सरकार ने यह भी उल्लेख किया कि Supreme Court of India ने 1 सितंबर 2025 के अपने निर्णय में टीईटी को अनिवार्य योग्यता माना है, इसलिए व्यापक छूट देने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।

किन शिक्षकों पर कैसे लागू होगी टीईटी अनिवार्यता?

सरकार के उत्तर के अनुसार:

    • जिन सेवागत शिक्षकों की सेवा में 5 वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें नियुक्ति की तिथि से 2 वर्ष के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा।
    • जिन शिक्षकों की सेवा में 5 वर्ष से कम समय शेष है, वे सेवानिवृत्ति तक सेवा में बने रह सकते हैं, भले ही टीईटी उत्तीर्ण न किया हो।
    • हालांकि, टीईटी पास किए बिना ऐसे शिक्षक पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे।

इस स्पष्टीकरण से उत्तर प्रदेश में टीईटी न करने वाले लगभग 1.86 लाख शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है।

शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया

अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा और उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ से जुड़े नेताओं का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि केंद्र सरकार शिक्षकों को राहत देने के लिए कानूनी प्रावधान लाएगी, लेकिन सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का हवाला देते हुए कोई नई राहत घोषित नहीं की।

शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए बढ़ती उम्र, पारिवारिक जिम्मेदारियां और स्वास्थ्य कारणों के बीच परीक्षा की तैयारी करना चुनौतीपूर्ण है। उनका मानना है कि सरकार को शिक्षकों के हित में व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।

क्या है सरकार का संदेश?

केंद्र का स्पष्ट संकेत है कि टीईटी को न्यूनतम शैक्षिक मानक के रूप में बनाए रखा जाएगा। यानी आने वाले समय में भी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर नियुक्ति एवं पदोन्नति के लिए टीईटी की शर्त प्रभावी रहेगी।

फिलहाल सामूहिक छूट की संभावना नहीं है, इसलिए पात्र शिक्षकों को निर्धारित समय-सीमा में टीईटी उत्तीर्ण करने की तैयारी करनी होगी।

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