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डिजिटल युग में शिक्षक: मर्यादा, अनुशासन और सोशल मीडिया नियमावली

Sir Ji Ki Pathshala

UP Basic Shiksha: शिक्षक सोशल मीडिया नियमावली और सेवा नियम 2026

आज के दौर में सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है, लेकिन एक सरकारी शिक्षक के लिए यह माध्यम 'दोधारी तलवार' की तरह है। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों पर UP Government Servant Conduct Rules, 1956 और सेवा नियमावली 1981 के कड़े प्रावधान लागू होते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर की गई एक छोटी सी गलती सेवा अभिलेखों (Service Record) पर भारी पड़ सकती है।

​UP Basic Shiksha: शिक्षक सोशल मीडिया नियमावली और सेवा नियम 2026

​1. डिजिटल अनुशासन: क्या कहता है नियम?

​शिक्षक समाज का दर्पण होता है, इसलिए उसका आचरण स्कूल के भीतर और बाहर, दोनों जगह मर्यादित होना अनिवार्य है। विभाग के अनुसार:

    • ड्यूटी समय में प्रतिबंध: विद्यालय अवधि के दौरान फेसबुक, इंस्टाग्राम, रील बनाना या निजी व्हाट्सएप चैटिंग पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसे "कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही" माना जाता है।
    • आभासी मर्यादा: सोशल मीडिया पर किया गया कोई भी पोस्ट, स्टेटस या कमेंट 'सार्वजनिक अभिव्यक्ति' की श्रेणी में आता है। यह सोचना गलत है कि "निजी अकाउंट" पर कुछ भी लिखने की स्वतंत्रता है।

​2. छात्रों के साथ ऑनलाइन संवाद की सीमाएं

​छात्रों की सुरक्षा और गरिमा सर्वोपरि है। शिक्षकों के लिए स्पष्ट निर्देश हैं:

    • निजी संपर्क वर्जित: किसी भी छात्र को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजना या देर रात व्यक्तिगत चैट करना गंभीर अनुशासनहीनता है।
    • फोटो एवं वीडियो: बिना आधिकारिक अनुमति के छात्रों की फोटो या वीडियो (खासकर रील/शॉट्स के लिए) सोशल मीडिया पर साझा करना IT Act और बाल अधिकार नियमों का उल्लंघन है।
    • शिक्षण समूह: केवल विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त व्हाट्सएप ग्रुपों में ही शैक्षणिक चर्चा की अनुमति है, जहाँ प्रधानाध्यापक या अधिकारी सदस्य हों।

​3. सरकार और विभाग के प्रति निष्ठा

​शिक्षक सरकारी तंत्र का हिस्सा है, अतः सरकार की नीतियों की सार्वजनिक आलोचना वर्जित है:

    • राजनीतिक तटस्थता: कंडक्ट रूल्स 1956 के तहत कोई भी शिक्षक किसी राजनीतिक दल का प्रचार या नेताओं के पक्ष-विपक्ष में सक्रिय टिप्पणी नहीं कर सकता।
    • नकारात्मक टिप्पणी: विभाग या अधिकारियों के विरुद्ध भ्रामक सूचना फैलाना या उनकी छवि धूमिल करना सीधे तौर पर 'प्रतिकूल प्रविष्टि' (Adverse Entry) का कारण बन सकता है।

​4. गोपनीयता का अधिकार और सुरक्षा

​विद्यालय के आंतरिक दस्तावेज, निरीक्षण रिपोर्ट या विभागीय पत्राचार को सोशल मीडिया पर वायरल करना एक दंडनीय अपराध है। गोपनीयता भंग करने की स्थिति में सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई का प्रावधान है।

​5. क्या है 'सेफ ज़ोन'? (शिक्षक क्या पोस्ट कर सकते हैं?)

​सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग शिक्षक की छवि को निखार भी सकता है:

    • प्रेरणादायक विचार: महापुरुषों के विचार और शिक्षाप्रद कहानियाँ साझा करना।
    • शैक्षणिक नवाचार: पढ़ाने के नए तरीके (बिना छात्रों की निजता भंग किए)।
    • रचनात्मक कार्य: साहित्य, कला या सामान्य ज्ञान से जुड़ी पोस्ट।
    • सकारात्मक उपलब्धियां: विभाग द्वारा आयोजित आधिकारिक कार्यक्रमों की जानकारी।

​निष्कर्ष: समझदारी ही बचाव है

​सोशल मीडिया पर 'लाइक' और 'व्यूज' की होड़ में अपनी सेवा की गरिमा को दांव पर न लगाएं। एक शिक्षक की कलम और कीबोर्ड, दोनों का उपयोग समाज निर्माण और छात्र हित में होना चाहिए, न कि विवाद खड़ा करने के लिए। याद रखें, आपकी एक 'पोस्ट' आपकी वर्षों की तपस्या और करियर को प्रभावित कर सकती है।

"शिक्षक कभी साधारण नहीं होता, प्रलय और निर्माण उसकी गोद में पलते हैं—डिजिटल जगत में भी इस गरिमा को बनाए रखें।"


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