लखनऊ। प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत करीब 62 हजार प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की सेवा सुरक्षा बहाल होने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम, 2023 में आवश्यक संशोधन का प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
क्या था पहले का प्रावधान?
एडेड कॉलेजों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों का चयन पहले माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से होता था, जबकि नियोक्ता प्रबंधक होते थे। अधिनियम-1982 की धारा-21 के तहत किसी भी प्रधानाचार्य या शिक्षक पर कार्रवाई या दंड देने से पहले चयन बोर्ड से अनुमोदन लेना अनिवार्य था। इससे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित रहती थी।
बाद में चयन बोर्ड का विलय कर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन किया गया। 21 अगस्त 2023 को विधानसभा से पारित नए अधिनियम में यह प्रावधान शामिल नहीं किया गया, जिसके कारण पिछले ढाई वर्षों में प्रबंधकों द्वारा मनमानी कार्रवाई की शिकायतें बढ़ीं।
शिक्षक संगठनों की पहल
माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी और महामंत्री नरेंद्र कुमार वर्मा के साथ 20 जनवरी को अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेनशर्मा से लखनऊ में मुलाकात कर सेवा सुरक्षा प्रावधान जोड़ने की मांग की थी।
इसके बाद 28 जनवरी को हुई उच्चस्तरीय बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने निर्देश दिया कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम, 2023 में सेवा-सुरक्षा संबंधी प्रावधानों को जोड़ने पर गंभीरता से विचार किया जाए।
आगे क्या होगा?
विशेष सचिव ने चयन आयोग अधिनियम, 2023 में धारा-18 और 21 के समावेश के लिए विस्तृत और सुविचारित आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो प्रदेश के हजारों प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को दोबारा पूर्व जैसी सेवा सुरक्षा प्राप्त हो सकेगी।
शिक्षक संगठनों का मानना है कि यह संशोधन लागू होने पर प्रबंधकों द्वारा की जाने वाली मनमानी कार्रवाई पर रोक लगेगी और शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी।


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