प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत नई शिक्षक भर्ती की राह देख रहे लाखों अभ्यर्थियों और शिक्षामित्रों के लिए एक बड़ी खबर है। 69,000 शिक्षक भर्ती के लंबे समय से चले आ रहे विवाद के बीच, अब शिक्षामित्रों ने नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी है।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का हवाला
शिक्षामित्रों ने सिविल अपील (3708/2020) 'राम शरण मौर्य बनाम स्टेट ऑफ यूपी' के मामले में एक प्रार्थना पत्र (Miscelleneous Application) दाखिल किया है। इस आवेदन में तर्क दिया गया है कि:
- सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में यह स्पष्ट किया था कि अगली भर्ती में शिक्षामित्रों को आयु सीमा में छूट, भारांक (वेटेज) और पात्रता में रियायत दी जाएगी।
- राज्य सरकार ने भी इस शर्त पर अपनी सहमति जताई थी।
- हैरानी की बात यह है कि इस आदेश को पारित हुए 5 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने अब तक नई भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं किया है।
खाली पदों का गणित: 51,112+27,713
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को सरकार के पुराने हलफनामों की याद दिलाई है। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि:
- 51,112 पद: जून 2020 में राज्य सरकार ने खुद स्वीकार किया था कि प्राथमिक शिक्षकों के इतने पद रिक्त हैं।
- 27,713 पद: 68,500 शिक्षक भर्ती से बचे हुए इन रिक्त पदों को भरने के निर्देशों का भी अब तक पालन नहीं हुआ है।
आगे क्या होगा?
यदि सुप्रीम कोर्ट इस पर कड़ा रुख अपनाता है, तो राज्य सरकार पर जल्द से जल्द नई विज्ञप्ति जारी करने का दबाव बढ़ेगा। यह न केवल शिक्षामित्रों के लिए बल्कि यूपी के उन लाखों युवाओं के लिए भी उम्मीद की किरण है जो वर्षों से सुपर टेट (Super TET) का इंतजार कर रहे हैं।


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