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इरादों में जान हो तो आसमां भी झुकता है: छत्तीसगढ़ PCS-J में झूंसी की अंजुम आरा ने किया टॉप

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज/झूंसी। सफलता शोर नहीं मचाती, बल्कि उसके परिणाम गूँजते हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है प्रयागराज के झूंसी में रहने वाली अंजुम आरा ने। छत्तीसगढ़ प्रांतीय न्यायिक सेवा परीक्षा (PCS-J) में प्रथम स्थान प्राप्त कर अंजुम ने न केवल संगम नगरी, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश का मान बढ़ाया है। गुरुवार रात जैसे ही परीक्षा के परिणाम घोषित हुए, झूंसी स्थित उनके घर पर उत्सव का माहौल बन गया।

संघर्ष और निरंतरता की मिसाल

​मूल रूप से अमेठी के गौरीगंज की रहने वाली अंजुम का परिवार फिलहाल झूंसी के चक हरिहर वन में किराये के मकान में रहता है। उनके पिता शमीम अहमद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में असिस्टेंट मैनेजर हैं। अंजुम ने अपनी सफलता के पीछे के संघर्ष को साझा करते हुए बताया कि शुरुआती प्रयासों में मिली असफलताओं ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया, बल्कि और मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।

PCS-J Topper Anjum Ara Jhusi Prayagraj

गोल्ड मेडलिस्ट से 'जज' बनने तक का सफर

​अंजुम की शैक्षणिक यात्रा मेधावी रही है:

  • प्रारंभिक शिक्षा: फूलपुर और सेंट्रल एकेडमी, झूंसी।
  • उच्च शिक्षा: इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एलएलबी (LLB) की डिग्री, जिसमें उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया।
  • प्रेरणा: न्यायिक सेवा में आने की प्रेरणा उन्हें अपने ताऊ (बड़े पिता) इसरार अहमद से मिली, जो स्वयं अपर जिला जज (ADJ) के पद पर कार्यरत हैं।

सफलता का मंत्र: सोशल मीडिया से दूरी और मनोरंजन का संतुलन

​अंजुम की सफलता की रणनीति काफी दिलचस्प और संतुलित रही है:

    • सीमित डिजिटल उपयोग: उन्होंने खुद को इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से पूरी तरह दूर रखा। केवल जरूरत के लिए व्हाट्सएप और यूट्यूब का उपयोग किया।
    • अनुशासित पढ़ाई: वे हर दिन 4 से 5 घंटे की गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई पर ध्यान देती थीं।
    • स्ट्रेस मैनेजमेंट: पढ़ाई के तनाव को कम करने के लिए वे खाली समय में फिल्में देखना पसंद करती थीं।

​"​​​​मेरी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय मेरी माँ अख्तरी बेगम और मेरे परिवार को जाता है, जिन्होंने हर मुश्किल वक्त में मेरा साथ दिया।"

— अंजुम आरा (BSA)

    बधाइयों का तांता

    ​अंजुम की इस ऐतिहासिक जीत पर उनके भाई फरहान और उनके करीबी मित्रों (वैशाली, दिशा, शाल्वी और इरशाद) ने घर पहुँचकर अपनी खुशी जाहिर की। एक मध्यमवर्गीय परिवार की बेटी का टॉप रैंक हासिल करना समाज की उन सभी बेटियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखती हैं।


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