नई दिल्ली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती 2011 एक बार फिर कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस भर्ती से संबंधित अवमानना याचिका (Contempt Petition) पर सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में अपना विस्तृत पक्ष रखा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया में कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन किया जा चुका है।
नियुक्तियों का गणित: 66 हजार से अधिक पद भरे गए
सरकार द्वारा कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 72,825 विज्ञापित पदों के सापेक्ष अब तक कुल 66,655 प्रशिक्षु शिक्षकों को नियुक्ति दी जा चुकी है। शासन का तर्क है कि भर्ती की मुख्य प्रक्रिया काफी समय पहले ही संपन्न हो चुकी है और अधिकांश पदों पर शिक्षक कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं।
रिक्त पदों पर सरकार की सफाई
भर्ती में बचे हुए पदों को लेकर सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि वर्तमान में कुल 4,465 पद रिक्त हैं। हालांकि, इन रिक्तियों के पीछे का कारण आरक्षण श्रेणी है। सरकार के मुताबिक:
- 3,358 पद: अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं।
- 1,107 पद: अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं। सरकार का कहना है कि योग्य आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी न मिलने या तकनीकी कारणों से ये पद खाली रह गए हैं।
12091 और 1100 अभ्यर्थियों का मामला
सरकार ने कोर्ट को याद दिलाया कि पूर्व में 13 दिसंबर 2019 के आदेश के तहत 1100 और 12091 अभ्यर्थियों की चयन प्रक्रिया की जांच की गई थी। उस समय चयन प्रक्रिया को सही पाया गया था और किसी भी प्रकार की विसंगति से इनकार किया गया था। इसी आधार पर सरकार ने नई अवमानना याचिका को खारिज करने की मांग की है।
2017 के बाद का 'रिकॉर्ड' नियुक्तियों का हवाला
बेसिक शिक्षा विभाग की सक्रियता दिखाते हुए सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि 2017 के बाद से अब तक 1,26,371 शिक्षकों की रिकॉर्ड नियुक्तियां की गई हैं। इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- 12,460 भर्ती: 11,804 नियुक्तियां पूर्ण।
- 68,500 भर्ती: 45,567 पद भरे गए।
- 69,000 भर्ती: पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न।
देरी और याचिका की वैधता पर सवाल
सरकार ने अपनी दलील में यह भी कहा कि 6 साल के लंबे अंतराल के बाद वर्ष 2023 में अवमानना याचिका दायर करना न्यायसंगत नहीं है। शासन के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया को समाप्त हुए एक लंबा समय बीत चुका है, ऐसे में अब पुरानी प्रक्रियाओं को फिर से खोलना उचित नहीं होगा।
निष्कर्ष और सबकी निगाहें कल की सुनवाई पर
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से इस अवमानना याचिका को निरस्त करने का अनुरोध किया है। अब सारा दारोमदार माननीय न्यायालय के निर्णय पर टिका है। कल, 10 फरवरी 2026 को होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि क्या 72,825 शिक्षक भर्ती का अध्याय हमेशा के लिए बंद होगा या अभ्यर्थियों को कोई नई राहत मिलेगी।


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