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हाई स्कूल प्रमाणपत्र है तो आयु निर्धारण के लिए मेडिकल जाँच की मांग कानून का दुरूपयोग - इलाहाबाद हाई कोर्ट

Sir Ji Ki Pathshala 0

प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब पीड़िता की आयु का निर्धारण हाई स्कूल प्रमाणपत्र के माध्यम से हो चुका हो, तब उम्र जानने के लिए मेडिकल या अस्थि परीक्षण की मांग करना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने इस तरह की मांग को अनुचित मानते हुए याचिका को पाँच हजार रुपये के हर्जाने के साथ खारिज कर दिया।

यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकलपीठ ने सिद्ध उर्फ हसमुद्दीन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामला गोरखपुर जिले के पिपराइच थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां आरोपित के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज है।

हाई स्कूल प्रमाणपत्र है तो आयु निर्धारण के लिए मेडिकल जाँच की मांग कानून का दुरूपयोग - HIGH COURT

याचिकाकर्ता ने पीड़िता की आयु निर्धारण के लिए अस्थि परीक्षण (मेडिकल जाँच) कराने की मांग की थी, जिसे ट्रायल कोर्ट ने पहले ही खारिज कर दिया था। इसके बाद आरोपित ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हाई स्कूल प्रमाणपत्र आयु निर्धारण का विश्वसनीय दस्तावेज है और ऐसे दस्तावेज के मौजूद होने के बावजूद मेडिकल परीक्षण की मांग करना न केवल अनावश्यक है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की याचिकाएं मुकदमे की कार्यवाही को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने और कानून के उद्देश्य को विफल करने का प्रयास होती हैं, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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