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विवाहिता पुत्री भी मृतक आश्रित नियुक्ति की हकदार: इलाहाबाद हाई कोर्ट

Sir Ji Ki Pathshala 0

प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि विवाहिता पुत्री भी मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्ति पाने की पूरी तरह हकदार है। कोर्ट ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सिद्धार्थ नगर को निर्देश दिया है कि वह याची की नियुक्ति पर दो माह के भीतर विचार कर आदेश पारित करे।

न्यायालय ने मृतक आश्रित नियुक्ति से इंकार करने संबंधी बीएसए का आदेश रद्द कर दिया और कहा कि जब संशोधित नियमावली से ‘अविवाहित’ शब्द हटा दिया गया है, तब केवल ‘पुत्री’ शब्द शेष रहता है, जिसमें विवाहित और अविवाहित दोनों पुत्रियाँ शामिल हैं। ऐसे में विवाहिता पुत्री को नियुक्ति से वंचित करना नियमों के विपरीत है।

विवाहिता पुत्री भी मृतक आश्रित नियुक्ति की हकदार

यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने नीतू अनिता देवी द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए दिया। याची की ओर से अधिवक्ता अक्षय रघुवंशी तथा राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार सिंह ने पक्ष रखा।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिका के अनुसार, नीतू अनिता देवी के पिता प्राथमिक पाठशाला गौरा इटवा, जनपद सिद्धार्थ नगर में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थे। सेवाकाल के दौरान 8 जनवरी 2020 को उनका निधन हो गया। परिवार में केवल पत्नी और पुत्री ही शेष रह गए।

पिता की मृत्यु के बाद पुत्री ने मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने विवाहिता होने का हवाला देकर आवेदन अस्वीकार कर दिया था। इस आदेश को याची ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

हाई कोर्ट ने कहा कि संशोधित नियमावली के अनुसार पुत्री को नियुक्ति से वंचित करने का कोई वैधानिक आधार नहीं है। विवाह के आधार पर पुत्री के अधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता।

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