लखनऊ। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता से छूट देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इस संबंध में यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) के पदाधिकारियों ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर अपनी मांग उनके समक्ष रखी।
यूटा के पदाधिकारियों का कहना है कि देशभर में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) लागू होने से पहले नियुक्त किए गए करीब 25 लाख शिक्षक इस नियम के दायरे में आ रहे हैं। ये शिक्षक वर्षों से सेवा दे रहे हैं और उनके अनुभव को नजरअंदाज कर टीईटी जैसी परीक्षा अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है।
संगठन ने मंत्री को बताया कि लंबे समय से विद्यालयों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उनसे दोबारा पात्रता परीक्षा पास करने की शर्त मानसिक दबाव और असमंजस की स्थिति पैदा कर रही है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मांग की गई कि आरटीई लागू होने से पूर्व सेवारत शिक्षकों को टीईटी से स्थायी छूट प्रदान की जाए, ताकि वे बिना किसी अनिश्चितता के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें। संगठन को उम्मीद है कि इस मांग पर केंद्र सरकार सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी और शिक्षकों के हित में सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।


