पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत गैर-सरकारी क्षेत्र के निवेशकों को बड़ी राहत दी है। अब एनपीएस में निवेश बनाए रखने की पांच साल की अनिवार्य शर्त समाप्त कर दी गई है। इस फैसले से उन निवेशकों को लाभ होगा जो किसी कारणवश बीच में ही एनपीएस से बाहर निकलना चाहते हैं। हालांकि, सरकारी कर्मचारियों पर लॉक-इन की शर्त पहले की तरह लागू रहेगी।
एनपीएस खाते को बनाया जा सकेगा गारंटी
पीएफआरडीए ने एक और अहम बदलाव करते हुए एनपीएस खाते को वित्तीय संस्थानों के समक्ष गारंटी के रूप में रखने की अनुमति दे दी है। इसके तहत निवेशक तय सीमा तक कर्ज लेने के लिए एनपीएस से मिलने वाले लाभों को हस्तांतरित, गारंटी या प्रतिभूति के रूप में रख सकता है। इससे निजी क्षेत्र के निवेशकों को वित्तीय जरूरतों के समय अतिरिक्त सहारा मिलेगा।
निवेशकों को ज्यादा लचीलापन देने की पहल
इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य गैर-सरकारी यानी निजी क्षेत्र से जुड़े निवेशकों को अधिक लचीलापन देना है। नए नोटिफिकेशन में एनपीएस से निकासी के लिए किसी अनिवार्य समय-सीमा का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अब निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार योजना से बाहर निकल सकते हैं।
विशेष परिस्थितियों में पूरी निकासी संभव
नए नियमों के तहत कुछ विशेष हालात में पूरी राशि निकालने की अनुमति दी गई है। यदि कोई निवेशक भारतीय नागरिकता छोड़ता है, तो वह अपना पूरा एनपीएस कोष एकमुश्त निकाल सकता है। निवेशक की मृत्यु की स्थिति में जमा रकम नॉमिनी या कानूनी वारिस को दी जाएगी। वहीं, यदि कोई निवेशक लापता हो जाता है और उसे मृत मान लिया जाता है, तो पहले 20 प्रतिशत राशि अंतरिम राहत के तौर पर दी जाएगी।
आठ लाख रुपये तक पूरी निकासी की सुविधा
पीएफआरडीए ने छोटे निवेशकों को भी राहत दी है। अगर किसी निवेशक की कुल जमा पेंशन राशि आठ लाख रुपये या उससे कम है, तो उसे एन्युटी प्लान खरीदने की जरूरत नहीं होगी। ऐसी स्थिति में पूरी राशि एकमुश्त या किश्तों में निकाली जा सकेगी। यदि कुल राशि आठ लाख से अधिक और बारह लाख रुपये से कम है, तो छह लाख रुपये तक एकमुश्त निकासी का विकल्प मिलेगा।
85 वर्ष की उम्र तक निवेश का विकल्प
नए संशोधन के तहत निवेशक अब 85 वर्ष की उम्र तक एनपीएस में बने रह सकते हैं। हालांकि, तय शर्तों के तहत वे इससे पहले भी योजना से बाहर निकल सकते हैं। सामान्य रूप से 15 साल की सदस्यता पूरी होने या 60 साल की उम्र, रिटायरमेंट या सुपरएनुएशन—जो पहले हो—पर निकासी की जा सकती है।
बड़े कोष वाले निवेशकों के लिए भी राहत
यदि किसी गैर-सरकारी निवेशक का एनपीएस कोष 12 लाख रुपये से अधिक है, तो अब वह 80 प्रतिशत राशि एकमुश्त निकाल सकता है। केवल 20 प्रतिशत राशि को एन्युटी में लगाना अनिवार्य होगा, जिससे कम से कम छह साल की अवधि के लिए नियमित भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। इससे रिटायरमेंट के समय निवेशकों के हाथ में अधिक नकदी रहेगी और वे अपनी जरूरतों के अनुसार इसका उपयोग कर सकेंगे।
पीएफआरडीए के इन फैसलों को एनपीएस को अधिक निवेशक-अनुकूल और लचीला बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे निजी क्षेत्र के निवेशकों का भरोसा और भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।


