आइए इसे ऐसे समझते हैं -
अब आगे कुछ प्रश्नों के उत्तर सोचें-
- क्या आपको अपनी ID और PASSWORD ज्ञात हैं?
- आपके ID और PASSWORD आपके अलावा किसी और के पास तो नहीं हैं? (नियमानुसार प्रधानाध्यापक के पास भी नहीं होने चाहिए)
- अब तक आपने अपनी ID से कितनी राशि ऑपरेट/ट्रांजेकट कर दी?
- उस राशि से आपके विद्यालय में क्या कार्य हुए? और क्या सामान आया? वास्तव में भौतिक रूप में कार्य हुआ है या नहीं? सामान आया है या नहीं?
- कार्य या सामान के बिल असली हैं या फर्जी कूटरचित
यदि उपर्युक्त प्रश्नों में अधिकांश के उत्तर नहीं में हैं, और कुछ प्रधानाध्यापक ने कुछ भी गलत किया है तो आप भी बिना कुछ करे तकनीकी रूप से फंस चुके हैं।
याद रखें यदि आपके विद्यालय के किसी भी खाते में धनराशि पड़ी हुई है और आपने उसे हाथ भी नहीं लगाया तो केवल उदासीनता, लापरवाही का मामला बनता है। जोकि क्षम्य होता है। लेकिन धनराशि बाहर निकलने के बाद उसका दुरुपयोग हुआ है तो गबन का मामला बनता है। इसमें आगे चलकर बहुत ही परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस मामले में निलम्बन तो आम है।
🔴 कुछ प्रधानाध्यापक साइबर कैफे या कम्प्यूटर ग्रांट वालों से फोन पर या उनकी दुकान पर जाकर पूछ रहे हैं कि हमारे विद्यालय के SMC खाते में कितनी ग्रांट आयी है। इसका अर्थ तो ये निकल रहा है कि उन्होंने अपने वरिष्ठ सहायक अध्यापक को ऑपरेटर ID और पासवर्ड बताये ही नहीं हैं।


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