यूपी कौशल विकास मिशन: अब प्रशिक्षण केंद्र के 500 मीटर के दायरे में दर्ज होगी बायोमीट्रिक उपस्थिति
लखनऊ। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के अंतर्गत संचालित प्रशिक्षण केंद्रों में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे अभ्यर्थियों के लिए राहत भरी खबर है। अब प्रशिक्षार्थी अपने प्रशिक्षण केंद्र के 500 मीटर के दायरे में आधार आधारित बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे। इसके लिए मिशन ने जियोफेंसिंग की निर्धारित सीमा में बदलाव किया है। पहले यह सीमा केवल 100 मीटर निर्धारित थी।
दरअसल, प्रशिक्षण केंद्रों पर आधार आधारित बायोमीट्रिक अटेंडेंस दर्ज करने के दौरान तकनीकी समस्याएं सामने आ रही थीं। कई बार उपस्थिति लॉक करते समय सिस्टम वास्तविक स्थान से कई किलोमीटर दूर की लोकेशन दिखा रहा था। इससे प्रशिक्षण संस्थानों और प्रशिक्षार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
प्रशिक्षण केंद्रों की समस्याओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था में संशोधन के निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब प्रशिक्षण केंद्र के निर्धारित स्थान से 500 मीटर तक के दायरे में जियोफेंसिंग के अनुसार उपस्थिति दर्ज की जा सकेगी।
48 घंटे में पोर्टल पर अपडेट होगी नई व्यवस्था
मिशन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, सभी प्रशिक्षण केंद्रों के पोर्टल लॉगिन में संबंधित केंद्र की उपस्थिति व्यवस्था अपडेट करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यह सुविधा 48 घंटे के भीतर सक्रिय हो जाएगी। सभी प्रशिक्षण केंद्रों को अपने केंद्र का सही लॉन्जिट्यूड (Longitude) और लैटीट्यूड (Latitude) पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं।
फर्जी लोकेशन एप का प्रयोग करने पर होगी कार्रवाई
मिशन निदेशक ने प्रशिक्षण संस्थानों और प्रशिक्षार्थियों को चेतावनी दी है कि उपस्थिति दर्ज कराने के लिए किसी भी प्रकार के फर्जी या मॉक लोकेशन एप्लिकेशन अथवा अन्य प्रतिबंधित तकनीक का इस्तेमाल न किया जाए। इस तरह की शिकायत मिलने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
यदि किसी प्रशिक्षण केंद्र को नई व्यवस्था लागू करने या उपस्थिति दर्ज करने में तकनीकी समस्या आती है तो वह मिशन की आईटी टीम से संपर्क कर सकता है।
प्रशिक्षण संस्थानों और प्रशिक्षार्थियों को मिलेगी राहत
जियोफेंसिंग की सीमा 100 मीटर से बढ़ाकर 500 मीटर किए जाने से प्रशिक्षण केंद्रों में उपस्थिति दर्ज कराने से जुड़ी तकनीकी परेशानियां कम होने की उम्मीद है। इससे प्रशिक्षण संस्थानों और प्रशिक्षणार्थियों दोनों को सुविधा मिलेगी तथा आधार आधारित बायोमीट्रिक उपस्थिति की प्रक्रिया अधिक सुगम हो सकेगी।


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