नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि नेशनल बुक ट्रस्ट संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ की श्रेणी में आता है। न्यायालय के अनुसार, इस संस्थान पर सरकार का गहरा और व्यापक नियंत्रण है।
शुक्रवार को न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यह निर्णय सुनाया। अदालत ने नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया के अध्यक्ष और एक अन्य व्यक्ति की ओर से दाखिल अपीलों को खारिज कर दिया।
अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ माना गया NBT
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि नेशनल बुक ट्रस्ट पर सरकार का गहरा और व्यापक नियंत्रण है। इसी आधार पर इसे संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ की परिभाषा में शामिल माना गया है।
यह फैसला संस्थान की कानूनी स्थिति और उसके कामकाज के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है संविधान का अनुच्छेद 12?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 12 मौलिक अधिकारों के प्रावधानों के संदर्भ में ‘राज्य’ शब्द को परिभाषित करता है। इसके दायरे में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, संसद, राज्य विधानमंडल तथा निर्धारित शर्तों के अंतर्गत आने वाले अन्य प्राधिकरण और संस्थाएं शामिल हो सकती हैं।
जब कोई संस्था अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ मानी जाती है, तो उस पर संविधान के मौलिक अधिकारों से संबंधित प्रावधान लागू होते हैं।
नागरिकों को क्या होगा लाभ?
किसी संस्था को अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ माने जाने का महत्वपूर्ण परिणाम यह होता है कि उसके कार्यों को मौलिक अधिकारों के संवैधानिक मानकों पर परखा जा सकता है।
यदि किसी व्यक्ति को ऐसी संस्था के कार्य से अपने मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होने की शिकायत है, तो वह उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।
नेशनल बुक ट्रस्ट की अपील खारिज
इस मामले में नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया के अध्यक्ष और एक अन्य व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने दोनों अपीलों को खारिज कर दिया और नेशनल बुक ट्रस्ट को अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ की श्रेणी में माना।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से स्पष्ट हुआ है कि नेशनल बुक ट्रस्ट केवल एक सामान्य संस्थान नहीं है, बल्कि सरकार के गहरे और व्यापक नियंत्रण के कारण संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत ‘राज्य’ की श्रेणी में आता है। इस स्थिति में उसके कार्यों को मौलिक अधिकारों के संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होना होगा।


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