महराजगंज। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों की जांच को लेकर एक बार फिर मामला चर्चा में है। एक ही अंकपत्र या प्रमाणपत्र के आधार पर अलग-अलग व्यक्तियों के नौकरी करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश के बाद शिक्षकों के मूल अभिलेखों की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है। महराजगंज जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत करीब 5400 शिक्षक कार्यरत हैं। विभागीय स्तर पर अभिलेखों की जांच और शिक्षकों से शपथपत्र लेने की कार्रवाई की जा सकती है।
प्राप्त समाचार रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट ने प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों के मूल अभिलेख तलब करने और उन्हें विशेष कार्यबल (एसटीएफ) को सौंपने का निर्देश दिया है। इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षकों की नियुक्ति में लगाए गए प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता की जांच पर जोर दिया जा रहा है।
महराजगंज में पहले भी सामने आ चुका है मामला
महराजगंज जिले में एक ही प्रमाणपत्र के आधार पर दो व्यक्तियों के नौकरी करने का मामला पहले भी सामने आ चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में नौतनवा ब्लॉक क्षेत्र के तड़हवा प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत सूरज कुमार उपाध्याय पर दूसरे शिक्षक के शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर नौकरी करने का आरोप सामने आया था।
मामले की जांच एसटीएफ ने की थी। जांच में अभिलेखों को लेकर गड़बड़ी सामने आने की बात रिपोर्ट में कही गई है। इसके बाद संबंधित शिक्षक के विरुद्ध बर्खास्तगी और प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई की गई थी।
शिक्षकों से लिया जा सकता है शपथपत्र
समाचार रिपोर्ट के अनुसार, जिले में कार्यरत शिक्षकों के अभिलेखों की जांच के साथ उनसे शपथपत्र भी लिया जा सकता है। हालांकि, महराजगंज के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सुरजीत कुमार सिंह ने बताया कि इस संबंध में विभागीय निर्देश अभी प्राप्त नहीं हुआ है। निर्देश मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
महराजगंज जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत करीब 5400 शिक्षक कार्यरत हैं। हाईकोर्ट के निर्देश और विभागीय आदेशों के आधार पर आगे की जांच का दायरा तय होगा। जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि नियुक्तियों में इस्तेमाल किए गए शैक्षिक प्रमाणपत्र वास्तविक हों और एक ही अभिलेख का गलत तरीके से दोबारा इस्तेमाल न किया गया हो।


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