नई दिल्ली। मतदाता सूची में नाम जोड़ने से जुड़े 'फॉर्म-6' में कथित बदलाव को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा कि मूल फॉर्म-6 में कोई संशोधन या बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि इसके साथ केवल एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन) जोड़ा गया था। यह कदम बिहार में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) आदेश के तहत उठाया गया था।
आयोग का यह आधिकारिक स्पष्टीकरण सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि शीर्ष अदालत ने फॉर्म-6 में किसी भी प्रकार के बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। इसके तुरंत बाद निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में एसआईआर की पूरी प्रक्रिया को विधिक रूप से सही ठहराया था, जिसके तहत ही यह घोषणा-पत्र संलग्न किया गया था।
राहुल गांधी के आरोपों को बताया भ्रामक
निर्वाचन आयोग ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए उन्हें पूरी तरह भ्रामक करार दिया।
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने गैर-कानूनी और एकतरफा तरीके से फॉर्म-6 में बदलाव किया है और अब यह बात सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद साबित हो चुकी है।
आयोग ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि फॉर्म के मूल प्रारूप से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। केवल मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सटीक और त्रुटिहीन बनाने के उद्देश्य से घोषणा-पत्र का प्रावधान किया गया था, जिसे वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत ही अमल में लाया गया था।


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