भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन (CLI) की परिभाषा में बदलाव करते हुए यूनिफाइड लाइसेंस एग्रीमेंट में संशोधन किया है। विभाग की ओर से 13 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार, यह संशोधन 1 नवंबर 2026 से प्रभावी होगा।
दूरसंचार विभाग के लाइसेंसिंग पॉलिसी विंग की ओर से जारी संशोधन में कॉल करने वाले की पहचान से संबंधित प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है। इसके तहत कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन (CLI) में अब केवल टेलीफोन नंबर या आईपी एड्रेस के आधार पर पहचान तक सीमित व्यवस्था नहीं रहेगी, बल्कि इसमें अन्य निर्धारित पहचान संबंधी जानकारी भी शामिल की जा सकेगी।
संशोधित परिभाषा में क्या बदला?
पहले CLI का अर्थ कॉल करने वाले या कॉल शुरू करने वाले ग्राहक की पहचान से था। इसमें ITU की E.164 सिफारिश के अनुसार टेलीफोन नंबर, आईपी एड्रेस या लाइसेंसकर्ता द्वारा समय-समय पर निर्धारित अन्य पहचान शामिल थी।
अब संशोधित परिभाषा के अनुसार, कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन में तीन प्रकार की जानकारी शामिल हो सकती है:
- दूरसंचार सेवा प्रदाता की ओर से ग्राहक को दिया गया टेलीफोन या दूरसंचार पहचान नंबर।
- ग्राहक के सब्सक्राइबर डेटा रिकॉर्ड में दर्ज नाम।
- दूरसंचार विभाग की ओर से समय-समय पर निर्धारित की जाने वाली अन्य पहचान।
1 नवंबर से लागू होगा संशोधन
दूरसंचार विभाग ने आदेश में स्पष्ट किया है कि संशोधित परिभाषा 1 नवंबर 2026 से लागू होगी। इसके अलावा यूनिफाइड लाइसेंस एग्रीमेंट की अन्य शर्तें और प्रावधान पहले की तरह ही बने रहेंगे।


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