प्रयागराज/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में लंबे समय से अटकी शिक्षकों की पदोन्नति (Promotion) प्रक्रिया को लेकर उच्च न्यायालय में अहम सुनवाई हुई। कोर्ट नंबर-6 में चली इस सुनवाई के दौरान पीठ ने वरिष्ठता सूची के निर्धारण और पदोन्नति की रूपरेखा को लेकर राज्य सरकार से स्पष्ट दिशा-निर्देश तलब किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को तय की गई है।
कोर्ट ने वरिष्ठता सूची के उद्देश्य पर उठाए सवाल
सुनवाई की शुरुआत में राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अदालत को अवगत कराया कि शासन स्तर पर पदोन्नति प्रक्रिया गतिमान है और इसके लिए जिलों से वरिष्ठता सूचियां मांगी जा रही हैं।
इस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल किया कि वरिष्ठता सूची जारी करने के संबंध में जो परिपत्र (सर्कुलर) जारी किए गए हैं, उनका वास्तविक उद्देश्य क्या है? अदालत ने यह भी संज्ञान में लिया कि त्रिपुरारी दुबे प्रकरण के क्रम में वर्तमान में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में केवल प्रभारी प्रधानाध्यापकों की तैनाती की जा रही है। ऐसे में यदि यह वरिष्ठता सूची नियमित पदोन्नति के लिए तैयार की जा रही है, तो विभाग पदोन्नति और विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया कब तक पूर्ण करेगा।
7 अक्टूबर को स्थिति स्पष्ट करेगी सरकार
न्यायालय के इन सवालों पर सरकारी अधिवक्ता ने वस्तुस्थिति और स्पष्ट निर्देशों (Instructions) से कोर्ट को अवगत कराने के लिए समय मांगा। इसके बाद अदालत ने शासन को पूरी जानकारी के साथ उपस्थित होने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को निर्धारित कर दी।
शिक्षकों की नजरें अगली सुनवाई पर
प्रदेश के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हजारों शिक्षक लंबे समय से नियमित पदोन्नति और पारदर्शी विद्यालय आवंटन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वरिष्ठता सूची में विसंगतियों और प्रभारी व्यवस्था के चलते प्रक्रिया में लगातार हो रहे विलंब के बीच, अदालत द्वारा मांगी गई समयसीमा को शिक्षकों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें 7 अक्टूबर को सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।


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