गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश में घरों की छतों पर सोलर पैनल (Rooftop Solar) लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी की जा रही है। नई व्यवस्था के तहत अब सोलर उपभोक्ता अपनी जरूरत से ज्यादा बनने वाली अतिरिक्त बिजली को सीधे अपने पड़ोसियों या नजदीकी उपभोक्ताओं को बेच सकेंगे। इस व्यवस्था को पीयर-टू-पीयर (Peer-to-Peer या P2P) एनर्जी ट्रेडिंग कहा जाता है, जिसे राज्य में सबसे पहले गाजियाबाद से पायलट या शुरुआती चरण में लागू करने की योजना पर काम चल रहा है।
क्या है पीयर-टू-पीयर (P2P) एनर्जी ट्रेडिंग?
सामान्य व्यवस्था में रूफटॉप सोलर से उत्पन्न होने वाली अतिरिक्त बिजली को उपभोक्ता पारंपरिक ग्रिड में भेजते हैं, जिसके बदले उन्हें नेट-मीटरिंग के तहत क्रेडिट या बिल में समायोजन मिलता है।
इसके विपरीत, P2P सोलर एनर्जी ट्रेडिंग एक ऐसी तकनीक है जिसके जरिए बिजली उत्पादक उपभोक्ता (Prosumer) और बिजली की जरूरत वाले उपभोक्ता (Consumer) एक सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आपस में जुड़ जाते हैं। इसके तहत:
- सोलर उपभोक्ता सीधे स्थानीय स्तर पर किसी दूसरे उपभोक्ता को अपनी अतिरिक्त बिजली स्थानांतरित कर सकेंगे।
- बिजली की खरीद-बिक्री की दरें और लेन-देन डिजिटल माध्यम से पारदर्शी रूप से दर्ज होंगे।
सोलर उपभोक्ताओं और पड़ोसियों को क्या होगा लाभ?
- अतिरिक्त उत्पादन का अधिकतम लाभ: दोपहर के समय जब धूप तेज होती है, सोलर पैनलों से उत्पादन सबसे अधिक होता है, जबकि कई घरों में उस समय बिजली की खपत कम रहती है। ऐसे समय में अतिरिक्त बिजली को सीधे बेचकर उपभोक्ता अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे।
- सस्ती हरित ऊर्जा का विकल्प: जिन घरों में सोलर पैनल लगाने के लिए छत या स्थान उपलब्ध नहीं है, वे भी अपने पड़ोसी से स्वच्छ सौर ऊर्जा प्रतिस्पर्धी या किफायती दरों पर खरीद सकेंगे।
- ग्रिड पर दबाव में कमी: स्थानीय स्तर पर ही बिजली की खपत होने से ट्रांसमिशन लाइनों और बड़े पावर ग्रिडों पर अतिरिक्त लोड कम होगा।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्मार्ट मीटरिंग से होगा संचालन
P2P ट्रेडिंग का पूरा ढांचा आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म (अक्सर ब्लॉकचेन या स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट आधारित) के माध्यम से काम करेगा।
- स्मार्ट मीटरिंग: दोनों पक्षों के परिसरों पर स्मार्ट मीटर लगे होंगे, जो यह रिकॉर्ड करेंगे कि किसने कितनी बिजली ग्रिड में डाली और किसने कितनी खपत की।
- पारदर्शी बिलिंग: डिजिटल ऐप या पोर्टल के जरिए उपभोक्ताओं को यह जानकारी मिलेगी कि कितनी बिजली बेची गई और उसका कितना भुगतान हुआ।
कैसे पहुंचेगी पड़ोसी तक बिजली? ग्रिड का रहेगा अहम रोल
इस व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार का भ्रम न रहे, इसलिए यह समझना जरूरी है कि उपभोक्ता को अपने पड़ोसी के घर तक अलग से कोई तार या निजी केबल नहीं खींचनी होगी।
- पूरी बिजली का प्रवाह मौजूदा पावर कॉरपोरेशन (डिस्कॉम) के वितरण नेटवर्क (Distribution Grid) के जरिए ही होगा।
- उपभोक्ता केवल अपनी बिजली ग्रिड में इंजेक्ट करेंगे और संबंधित पड़ोसी उसी ग्रिड से उतनी बिजली का उपयोग करेंगे, जिसका डिजिटल समायोजन और बिलिंग P2P सिस्टम के तहत की जाएगी।
गाजियाबाद से शुरुआत, जल्द जारी होंगे विस्तृत नियम
शुरुआती तौर पर इस आधुनिक प्रणाली को गाजियाबाद क्षेत्र में लागू करने की तैयारी चल रही है। हालांकि, बिजली की प्रति यूनिट दर (टैरिफ), व्हीलिंग चार्ज (वितरण नेटवर्क शुल्क), पात्रता शर्तें और भुगतान तंत्र से संबंधित अंतिम तकनीकी व नियामकीय दिशा-निर्देश उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) और संबंधित ऊर्जा विभाग की आधिकारिक अधिसूचना के बाद पूरी तरह स्पष्ट होंगे।


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