प्रयागराज/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की पदोन्नति का बहुप्रतीक्षित मामला एक बार फिर न्यायिक दहलीज पर पहुंच गया है। यूपीटीईटी पास परिषदीय शिक्षकों ने पदोन्नति की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया है। पंकज कुमार सिंह, अमरेन्द्र प्रताप शाही समेत अन्य शिक्षकों द्वारा दाखिल इस याचिका पर जस्टिस पंकज भाटिया की अदालत में सुनवाई तय हुई है, जिस पर प्रदेश भर के शिक्षकों की नजरें टिकी हुई हैं।
परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के रिक्त पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया विभिन्न जिलों में वरिष्ठता विवादों के चलते वर्ष 2015 से लगातार प्रभावित रही है। इस गतिरोध को लेकर पूर्व में दाखिल याचिकाओं, जिनमें नरेश्वर राम एवं अन्य तथा सरला कुमारी की याचिकाएं शामिल हैं, का निस्तारण उच्च न्यायालय द्वारा क्रमशः 11 मार्च 2024 और 24 सितंबर 2024 को किया जा चुका है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर पदोन्नति प्रक्रिया आगे न बढ़ने से शिक्षकों में निराशा का माहौल है।
विभागीय स्तर पर देखें तो शासन ने 29 दिसंबर 2022 को प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के रिक्त पदों पर पदोन्नति के आदेश दिए थे। इसके क्रम में बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव द्वारा 31 जनवरी 2023 और 19 फरवरी 2023 को भी दिशा-निर्देश जारी किए गए। बाद में 4 जनवरी 2024 को अध्यापक सेवा नियमावली 1981 के प्रावधानों के अनुरूप सहायक अध्यापकों की पदोन्नति के निर्देश भी निर्गत हुए, किंतु प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकी।
बार-बार आदेश जारी होने के बावजूद परिणाम न निकलने से क्षुब्ध शिक्षकों ने अंततः अदालत की शरण ली है। अब देखना यह होगा कि हाईकोर्ट इस बहुप्रतीक्षित मामले में बेसिक शिक्षा विभाग को क्या दिशा-निर्देश जारी करता है।


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