नई दिल्ली। शिक्षकों की निर्धारित योग्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि लागू वैधानिक व्यवस्था के तहत निर्धारित आवश्यक योग्यता रखने वाले अभ्यर्थियों को ही स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षक के रूप में नियुक्त या सेवा में जारी रखा जा सकता है।
यह अंतरिम निर्देश उस जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों के प्रोविंशियलाइजेशन से जुड़ी वैधानिक योजनाओं को चुनौती दी गई है। याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि क्या ऐसी योजनाओं के जरिए बिना निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी भर्ती प्रक्रिया के शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों को नियमित सरकारी सेवा में शामिल किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। अदालत ने मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए फिलहाल यह अंतरिम व्यवस्था लागू की है कि निर्धारित वैधानिक योग्यता के बिना किसी शिक्षक की नियुक्ति या उसे सेवा में बनाए रखने की अनुमति नहीं होगी।
अदालत के अंतरिम निर्देश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), NCTE Act और UGC Act के तहत लागू आवश्यक योग्यताओं का उल्लेख किया गया है। यानी शिक्षक पद की प्रकृति और संबंधित संस्थान पर लागू नियमों के अनुसार जो योग्यता निर्धारित है, उसका पालन करना आवश्यक होगा।
इस आदेश का सीधा संदेश यह है कि केवल किसी योजना, व्यवस्था या अन्य आधार पर शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए निर्धारित शैक्षणिक या व्यावसायिक योग्यता की अनदेखी नहीं की जा सकती। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह एक अंतरिम आदेश है, अंतिम फैसला नहीं। मामले की आगे की सुनवाई में अदालत इस मुद्दे पर विस्तृत निर्णय लेगी।
अदालत का यह रुख शिक्षक भर्ती में निर्धारित योग्यता, पारदर्शी चयन प्रक्रिया और शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े मुद्दों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल संबंधित संस्थानों और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े पक्षों को लागू वैधानिक योग्यता और नियमों का पालन करना होगा।


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