नई दिल्ली। प्राइवेट स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए समान वेतन, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। अदालत ने संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र सरकार के साथ सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
प्राइवेट शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय नीति की मांग
याचिका ऑल इंडिया टीचर्स फेडरेशन की नेशनल कोऑर्डिनेटर लिगीमोल जॉर्ज ने अधिवक्ता दीपक प्रकाश के माध्यम से दाखिल की है। इसमें केंद्र सरकार से प्राइवेट स्कूल शिक्षकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा के लिए समयबद्ध तरीके से व्यापक राष्ट्रीय नीति बनाने पर विचार करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि निजी स्कूलों के शिक्षक शिक्षा के संवैधानिक दायित्व को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उनके लिए देशभर में समान सेवा और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। अलग-अलग राज्यों और संस्थानों के नियमों के कारण समान कार्य करने वाले शिक्षकों को अलग-अलग सुविधाएं मिल रही हैं।
पेंशन के साथ मेडिकल और बीमा सुविधा की मांग
याचिका में नेशनल प्राइवेट स्कूल टीचर्स वेलफेयर बोर्ड गठित करने के साथ शिक्षकों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन, चिकित्सा सहायता, बीमा और परिवार के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभ देने की मांग की गई है।
याचिका के अनुसार बड़ी संख्या में निजी स्कूल शिक्षक पर्याप्त पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा और बीमा सुरक्षा के बिना सेवानिवृत्त हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में बुढ़ापे या किसी आपात स्थिति के दौरान उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
याचिका में UDISE+ 2023-24 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि देश में 37 लाख से अधिक शिक्षक मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में कार्यरत हैं। याचिकाकर्ता ने निजी स्कूल शिक्षकों के लिए एक समान और प्रभावी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था लागू किए जाने की मांग की है।


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