उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) की कार्यप्रणाली और वहां पढ़ने वाली छात्राओं की शिक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 24 सितंबर 2026 को महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय द्वारा प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को एक सख्त आदेश जारी किया गया है। इस आदेश का मुख्य उद्देश्य इन आवासीय विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं की लगातार गिरती उपस्थिति को रोकना और शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करना है। दरअसल, यह आदेश इसलिए जारी करना पड़ा क्योंकि शासन द्वारा लगातार निर्देश दिए जाने के बावजूद प्रेरणा पोर्टल की समीक्षा में यह बात सामने आई कि छात्राएं नियमित रूप से विद्यालय नहीं पहुंच रही हैं।
विभागीय आदेश में प्रस्तुत किए गए आंकड़े जमीनी हकीकत को स्पष्ट करते हैं। समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2026 के महीने में पूरे प्रदेश में छात्राओं की अधिकतम उपस्थिति केवल 84 प्रतिशत ही रही। विभाग ने इस आंकड़े को निराशाजनक माना है, लेकिन सबसे अधिक चिंताजनक स्थिति प्रदेश के पांच जिलों—मेरठ, आजमगढ़, सोनभद्र, बलिया और गाजियाबाद—की है। इन जनपदों में छात्राओं की उपस्थिति 50 प्रतिशत से भी कम पाई गई है, जिसे जारी आदेश में अत्यंत खेदजनक बताया गया है। यह आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग की बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े रखने में स्थानीय स्तर पर कहीं न कहीं लापरवाही हो रही है।
इस समस्या का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए, राज्य परियोजना निदेशक ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को यह कड़ा निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने जनपदों में संचालित कस्तूरबा विद्यालयों की स्वयं नियमित समीक्षा करें। अधिकारियों को हर हाल में बालिकाओं की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आदेश को पूरी सख्ती से लागू करवाने के लिए इसकी प्रतिलिपि सभी जनपदों के जिलाधिकारियों (अध्यक्ष, जिला शिक्षा परियोजना समिति) तथा मुख्य विकास अधिकारियों को भी भेजी गई है। इससे यह स्पष्ट है कि अब कस्तूरबा विद्यालयों की निगरानी केवल शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिला प्रशासन भी इसमें सीधी दखल देगा, जिससे भविष्य में इन विद्यालयों की व्यवस्थाओं और उपस्थिति में सुधार होने की प्रबल संभावना है।




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