प्रयागराज। पुलिस विभाग में मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को मिलने वाली अनुकंपा नियुक्ति को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए पांच प्रतिशत कोटा और आवेदकों की संख्या अधिक होने पर ऑब्जेक्टिव टाइप टेस्ट की शर्त को वैध करार दिया है। इसके साथ ही इस व्यवस्था को चुनौती देने वाली नौ याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।
यह फैसला न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने अजय सिंह यादव सहित 25 अन्य की ओर से दाखिल कुल नौ याचिकाओं पर सुनाया।
क्या है पांच प्रतिशत कोटा का नियम
याचियों ने उत्तर प्रदेश उप-निरीक्षक एवं निरीक्षक (सिविल पुलिस) सेवा नियमावली, 2015 के नियम 5(1) में जोड़ी गई टिप्पणी को चुनौती दी थी। इस व्यवस्था के तहत हर साल सीधी भर्ती से भरे जाने वाले पदों में से अधिकतम पांच प्रतिशत पद ही अनुकंपा नियुक्ति के आश्रित वर्ग के लिए रखे जा सकते हैं।
याचियों का तर्क था कि उत्तर प्रदेश सेवाकाल में मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों की भर्ती नियमावली, 1974 में ऐसी पांच प्रतिशत की सीमा निर्धारित नहीं है। उनका कहना था कि नई व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 309 के विपरीत है।
आवेदक ज्यादा होने पर देना होगा ऑब्जेक्टिव टेस्ट
नियम में यह भी प्रावधान है कि यदि अनुकंपा नियुक्ति के आश्रित वर्ग में आवेदकों की संख्या उपलब्ध रिक्तियों से अधिक हो जाती है, तो अभ्यर्थियों को ऑब्जेक्टिव टाइप टेस्ट देना होगा।
इसके साथ ही प्रत्येक अभ्यर्थी को केवल एक अवसर दिए जाने का प्रावधान है। याचियों ने दलील दी थी कि टेस्ट की शर्त अनुकंपा नियुक्ति के मूल उद्देश्य को कमजोर करती है।
हाईकोर्ट ने क्यों सही माना प्रतिबंध
खंडपीठ ने अपने फैसले में पूर्व के ‘अंकुर गौतम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ (2019) मामले में दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया। उस मामले में अदालत ने पांच प्रतिशत की सीमा को मनमाना या भेदभावपूर्ण नहीं माना था।
अदालत के अनुसार बड़ी संख्या में पदों को अनुकंपा नियुक्ति के जरिए भरने से खुली प्रतियोगिता के माध्यम से भर्ती होने वाले अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। इसी आधार पर पांच प्रतिशत की सीमा को उचित और तर्कसंगत माना गया था।
नौ याचिकाएं खारिज
हाईकोर्ट ने संबंधित प्रावधानों को वैध मानते हुए अजय सिंह यादव और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल कुल नौ याचिकाओं को खारिज कर दिया। फैसले से पुलिस विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के लिए लागू पांच प्रतिशत सीमा और जरूरत पड़ने पर टेस्ट की व्यवस्था को न्यायिक समर्थन मिला है।


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