प्रयागराज। 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने भर्ती की अंतिम तिथि के बाद आवश्यक योग्यता हासिल करने वाले चार शिक्षकों को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती के लिए निर्धारित अंतिम तिथि तक अभ्यर्थी के पास जरूरी शैक्षिक योग्यता होना अनिवार्य है। बाद में हासिल की गई योग्यता के आधार पर पिछली तारीख से पात्रता का दावा नहीं किया जा सकता।
यह मामला उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के चार सहायक अध्यापकों से जुड़ा था। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी, बलिया के 30 अप्रैल 2025 के आदेश और उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव के 29 मई 2026 के आदेश को बरकरार रखा।
22 दिसंबर 2018 थी आवेदन की अंतिम तिथि
मामले में याचियों ने वर्ष 2019 की सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में हिस्सा लिया था। उनका कहना था कि आवेदन के समय उन्होंने अपने अंकों की सही जानकारी दी थी। उनके आवेदन स्वीकार किए गए, प्रवेश पत्र जारी हुए और परीक्षा में सफल होने के बाद उन्हें बलिया में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति भी मिली।
हालांकि, कोर्ट के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 22 दिसंबर 2018 थी, जबकि याचियों ने बीटीसी की आवश्यक योग्यता बाद में बैक पेपर देकर हासिल की। उनके बीटीसी प्रमाणपत्र 7 अगस्त 2019 को जारी हुए।
बाद में मिली योग्यता से पात्रता नहीं बनेगी
हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक नियुक्ति में निर्धारित शैक्षिक योग्यता की शर्त का पालन भर्ती की निर्धारित कटऑफ तिथि पर होना चाहिए। केवल आवेदन स्वीकार कर लिए जाने, प्रवेश पत्र जारी होने, परीक्षा में सफल होने अथवा नियुक्ति मिल जाने से यदि मूल पात्रता पूरी नहीं थी तो वह कमी समाप्त नहीं हो जाती।
अदालत के अनुसार अंतिम तिथि के बाद हासिल की गई योग्यता को पिछली तारीख से प्रभावी मानकर अभ्यर्थी को पात्र नहीं बनाया जा सकता।
लंबे समय तक नौकरी करने का तर्क भी स्वीकार नहीं
याचियों की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि वे लंबे समय से नौकरी कर रहे हैं और उन्हें वेतन भी मिलता रहा है। कोर्ट ने माना कि ऐसी स्थिति में सहानुभूति हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक नियुक्तियों में निर्धारित योग्यता और पारदर्शिता की अनिवार्य शर्तों से समझौता नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह तर्क भी स्वीकार नहीं किया कि अन्य अभ्यर्थियों को समान परिस्थितियों में लाभ मिला है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी दूसरे व्यक्ति को गलत तरीके से मिली राहत के आधार पर कोई अन्य व्यक्ति भी उसी गलत लाभ का दावा नहीं कर सकता।
अलग से विभागीय जांच की जरूरत नहीं
फैसले में कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि नियुक्ति की बुनियाद ही निर्धारित योग्यता के अभाव में कानूनी रूप से दोषपूर्ण है, तो सेवा समाप्त करने के लिए अलग से विभागीय अनुशासनात्मक जांच आवश्यक नहीं है।
इसी आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बलिया के चार सहायक अध्यापकों की याचिका खारिज कर दी और संबंधित विभागीय आदेशों को बरकरार रखा।
फैसले की मुख्य बातें
- मामला 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती से संबंधित है।
- बलिया के चार सहायक अध्यापकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
- भर्ती की अंतिम तिथि तक निर्धारित शैक्षिक योग्यता होना जरूरी है।
- 22 दिसंबर 2018 आवेदन की अंतिम तिथि थी।
- याचियों के बीटीसी प्रमाणपत्र 7 अगस्त 2019 को जारी हुए।
- बाद में प्राप्त योग्यता से पिछली तारीख की पात्रता नहीं बन सकती।
- लंबे समय तक नौकरी और वेतन मिलने से मूल पात्रता की कमी दूर नहीं होती।
- दूसरे अभ्यर्थी को मिली गलत राहत के आधार पर समान लाभ का दावा नहीं किया जा सकता।
- हाईकोर्ट ने चारों शिक्षकों की याचिका खारिज कर दी।


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म