लखनऊ: उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संचालित पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। स्कूली शिक्षा महानिदेशालय ने नया आदेश जारी करते हुए ग्राम पंचायतों में प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे ग्राम प्रधानों से मिड-डे मील खाते के संचालन की जिम्मेदारी वापस ले ली है। अब इस योजना का संचालन विद्यालय प्रबंध समिति (VMC) के अध्यक्ष यानी अभिभावक और सचिव के रूप में प्रधानाध्यापक संयुक्त रूप से करेंगे।
अब तक मिड-डे मील योजना के तहत बैंक खाते का संचालन ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक संयुक्त रूप से करते थे। लेकिन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जब प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे हैं, तब नई व्यवस्था लागू करते हुए खाते के संचालन की जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष को सौंप दी गई है।
नए निर्देशों के अनुसार मिड-डे मील का वितरण, रसोइयों के मानदेय का भुगतान, भोजन बनाने के लिए मिलने वाली कंटीजेंसी राशि का उपयोग तथा संबंधित वित्तीय कार्य अब विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष और प्रधानाध्यापक मिलकर करेंगे।
इस फैसले का ग्राम प्रधान संगठनों ने विरोध किया है। राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन का कहना है कि जब तक नए पंचायत चुनाव नहीं हो जाते, तब तक ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे हैं। ऐसे में मिड-डे मील खाते के संचालन का अधिकार उनसे वापस लेना उनके अधिकारों में कटौती है।
संगठन ने स्कूली शिक्षा महानिदेशालय को पत्र भेजकर इस व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। साथ ही पंचायती राज विभाग और बेसिक शिक्षा विभाग के बीच समन्वय बैठक आयोजित कर प्रशासक के रूप में कार्यरत ग्राम प्रधानों के अधिकार सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।
फिलहाल नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के बैंक खाते का संचालन विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष (अभिभावक) और प्रधानाध्यापक द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा।
मुख्य बातें
- परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे मील खाते के संचालन की व्यवस्था में बदलाव।
- प्रशासक बने ग्राम प्रधान अब संयुक्त खाते का संचालन नहीं करेंगे।
- विद्यालय प्रबंध समिति (VMC) के अध्यक्ष (अभिभावक) और प्रधानाध्यापक संयुक्त रूप से खाता संचालित करेंगे।
- रसोइयों के मानदेय और कंटीजेंसी राशि का भुगतान भी नई व्यवस्था के तहत होगा।
- ग्राम प्रधान संगठन ने फैसले का विरोध करते हुए शासन से बदलाव की मांग की।
- पंचायती राज विभाग और बेसिक शिक्षा विभाग के बीच समन्वय बैठक कराने की भी मांग उठाई गई।


