लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लखीमपुर खीरी में छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) के विपरीत प्रधानाध्यापकों को सरप्लस घोषित कर उनके समायोजन की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA), लखीमपुर खीरी को 12 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विद्यालयों में वास्तविक छात्र संख्या और छात्र-शिक्षक अनुपात की अनदेखी करते हुए प्रधानाध्यापकों को सरप्लस घोषित कर उनका समायोजन किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से विद्यालय की छात्र संख्या संबंधी एक सूची न्यायालय में प्रस्तुत की गई, जबकि याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव द्वारा जारी एक अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किया। दोनों दस्तावेजों में एक ही विद्यालय की छात्र संख्या अलग-अलग पाई गई।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायालय ने कहा कि दोनों में से एक सूची प्रथम दृष्टया गलत प्रतीत होती है। ऐसे में यह गंभीर मामला है कि न्यायालय के समक्ष गलत जानकारी क्यों प्रस्तुत की गई।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने BSA लखीमपुर खीरी को 12 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने का आदेश दिया कि उनके विरुद्ध न्यायालय को गुमराह करने के मामले में कार्रवाई क्यों न की जाए।
समायोजन पर लगी रोक
हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक 17 जून 2026 की सूची के आधार पर याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई या समायोजन नहीं किया जाएगा। इससे संबंधित प्रधानाध्यापकों को फिलहाल अंतरिम राहत मिल गई है।
मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त 2026 को होगी। उसी दिन BSA लखीमपुर को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा और मामले में अपना पक्ष रखना होगा।
महत्वपूर्ण: यह आदेश अंतरिम (Interim) है। अंतिम निर्णय अगली सुनवाई एवं न्यायालय के विस्तृत आदेश के बाद ही होगा।



