नई दिल्ली: बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं का उपयोग करने वाले करोड़ों ग्राहकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार और वित्तीय नियामकों की पहल के तहत CKYC (Central Know Your Customer) 2.0 का नया और उन्नत सिस्टम लागू किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के बाद ग्राहकों को हर बैंक, बीमा कंपनी, म्यूचुअल फंड या अन्य वित्तीय संस्था में बार-बार आधार, पैन और अन्य KYC दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
CKYC 2.0 का उद्देश्य KYC प्रक्रिया को अधिक सरल, तेज और सुरक्षित बनाना है। यदि किसी ग्राहक ने पहले से CKYC करवा रखा है, तो उसकी अनुमति (OTP सत्यापन) के बाद संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था केंद्रीय KYC डेटाबेस से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकेगी। इससे KYC प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाएगी और ग्राहकों को बार-बार दस्तावेज़ देने की परेशानी से राहत मिलेगी।
अब तक अलग-अलग वित्तीय संस्थानों में नया खाता खोलने, बीमा पॉलिसी लेने, म्यूचुअल फंड में निवेश करने या KYC अपडेट कराने के दौरान ग्राहकों को हर बार आधार कार्ड, पैन कार्ड और पते का प्रमाण दोबारा जमा करना पड़ता था। इसकी मुख्य वजह पुराने CKYC सिस्टम में अधूरे, पुराने और डुप्लीकेट रिकॉर्ड होना था, जिस कारण संस्थाएं केंद्रीय रिकॉर्ड पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर पाती थीं।
नई CKYC 2.0 व्यवस्था में प्रत्येक KYC रिकॉर्ड को "कॉन्फिडेंस स्कोर" दिया जाएगा। यह स्कोर बताएगा कि रिकॉर्ड कितना सही, अपडेटेड और विश्वसनीय है। इससे बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाएं ग्राहक की पहचान तेजी से सत्यापित कर सकेंगी और KYC प्रक्रिया में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
CKYC 2.0 के साथ डेटा सुरक्षा को भी पहले से अधिक मजबूत बनाया गया है। आधुनिक सुरक्षा तकनीकों की मदद से ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रहेगी। साथ ही फर्जी, डुप्लीकेट और अधूरे रिकॉर्ड की पहचान आसान होने से वित्तीय धोखाधड़ी पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि CKYC 2.0 भारत के डिजिटल बैंकिंग सिस्टम को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और ग्राहक-अनुकूल बनाएगा। इससे बैंकिंग, बीमा और निवेश सेवाओं का लाभ उठाने वाले करोड़ों लोगों का समय बचेगा और पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सुविधाजनक हो जाएगी।
CKYC 2.0 की मुख्य बातें
- एक बार KYC कराने के बाद बार-बार दस्तावेज़ जमा करने की जरूरत नहीं।
- OTP के जरिए अनुमति मिलने पर बैंक और वित्तीय संस्थाएं केंद्रीय डेटाबेस से KYC प्राप्त कर सकेंगी।
- हर KYC रिकॉर्ड को मिलेगा कॉन्फिडेंस स्कोर।
- आधार, पैन और अन्य दस्तावेज़ बार-बार जमा करने की झंझट खत्म।
- KYC प्रक्रिया पहले से अधिक तेज, आसान और डिजिटल होगी।
- डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को और मजबूत बनाया गया।
- फर्जी और डुप्लीकेट रिकॉर्ड की पहचान आसान होगी।
- बैंक, बीमा, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय सेवाओं में मिलेगा लाभ।


