नई दिल्ली। जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। लोकसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। इससे पहले यह विधेयक 29 जुलाई 2026 को राज्यसभा से भी पारित हो चुका है। सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य पंजीकरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और डिजिटल बनाना है, ताकि फर्जी प्रमाणपत्रों और गलत पंजीकरण पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
नए कानून के तहत यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण दो वर्ष से अधिक समय बाद कराया जाता है, तो अब प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। वहीं, एक वर्ष से दो वर्ष के बीच देरी से होने वाले पंजीकरण के मामलों में पहले की तरह जिला मजिस्ट्रेट (DM) या उप जिला मजिस्ट्रेट (SDM) की अनुमति की व्यवस्था जारी रहेगी।
सरकार का मानना है कि वर्षों बाद किए जाने वाले पंजीकरण में गलत जानकारी देकर फर्जी जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की आशंका रहती है। ऐसे मामलों पर रोक लगाने और रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह संशोधन किया गया है।
यदि माता-पिता, अस्पताल या कोई अन्य संबंधित व्यक्ति निर्धारित समय सीमा के भीतर जन्म या मृत्यु की सूचना नहीं देता या गलत जानकारी उपलब्ध कराता है, तो उस पर 1,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, यदि कोई पंजीकरण अधिकारी बिना उचित कारण प्रमाणपत्र जारी करने में देरी करता है या आवेदन को अनुचित रूप से अस्वीकार करता है, तो उसके विरुद्ध भी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
इस संशोधन के तहत पूरे देश में जन्म और मृत्यु का केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इससे नागरिकों का रिकॉर्ड सुरक्षित और डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा तथा विभिन्न सरकारी विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज और आसान होगा।
डिजिटल जन्म प्रमाणपत्र को भविष्य में कई सरकारी सेवाओं के लिए एकल पहचान और आयु प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा। इसका उपयोग स्कूल एवं कॉलेज में प्रवेश, आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने, विवाह पंजीकरण और सरकारी नौकरियों में आवेदन सहित अनेक कार्यों में किया जा सकेगा।
इसके अलावा, जब कोई नागरिक 18 वर्ष की आयु पूरी करेगा, तो जन्म डेटाबेस के आधार पर उसका नाम मतदाता सूची में जोड़ने की प्रक्रिया भी अधिक सरल और तेज हो जाएगी। अस्पतालों द्वारा जन्म और मृत्यु की जानकारी सीधे पोर्टल पर दर्ज किए जाने से बीमा क्लेम, संपत्ति के नामांतरण तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी नागरिकों को कम कागजी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
केंद्र सरकार के अनुसार जन्म और मृत्यु का सही रिकॉर्ड जनगणना, स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और सरकारी नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अत्यंत आवश्यक है। समय पर और सही पंजीकरण होने से सरकारी आंकड़े अधिक सटीक होंगे तथा योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचाने में आसानी होगी।
मुख्य बातें
- ✅ लोकसभा ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी।
- ✅ दो वर्ष से अधिक देरी से पंजीकरण कराने पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य होगी।
- ✅ एक से दो वर्ष की देरी वाले मामलों में डीएम/एसडीएम की अनुमति की व्यवस्था जारी रहेगी।
- ✅ गलत जानकारी देने या समय पर सूचना न देने पर ₹1,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
- ✅ पंजीकरण अधिकारी द्वारा बिना कारण देरी करने पर भी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
- ✅ पूरे देश के लिए केंद्रीय डिजिटल जन्म एवं मृत्यु डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
- ✅ डिजिटल जन्म प्रमाणपत्र को कई सरकारी सेवाओं में पहचान और आयु प्रमाण के रूप में मान्यता मिलेगी।
- ✅ नए कानून का उद्देश्य फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक, पारदर्शिता बढ़ाना और नागरिक सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाना है।


