प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में उच्च प्राथमिक विद्यालयों एवं सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूलों के प्रधानाध्यापकों/प्रधानाध्यापिकाओं को खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) के पद पर पदोन्नति देने की प्रक्रिया एक बार फिर तेज हो गई है। शिक्षा निदेशालय (बेसिक), उत्तर प्रदेश ने सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों (बेसिक) को निर्देश जारी करते हुए पात्र प्रधानाध्यापकों का विवरण निर्धारित प्रारूप में शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा है।
शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। न्यायालय ने संबंधित प्रकरण में पदोन्नति के मामलों पर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद विभाग ने आवश्यक सूचनाएं जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
न्यायालय के आदेश के बाद बढ़ी प्रक्रिया
विभाग ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन में उच्च प्राथमिक विद्यालयों एवं सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को खण्ड शिक्षा अधिकारी (पूर्व पदनाम–प्रति उप विद्यालय निरीक्षक) के पद पर पदोन्नति के लिए पात्रता संबंधी सूचना मांगी गई है।
पात्रता के लिए मांगी गई जानकारी
निर्देश के अनुसार सभी मंडलीय अधिकारियों को अपने अधीन आने वाले जिलों से पात्र प्रधानाध्यापकों का विवरण निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराना होगा। इसके साथ संबंधित शिक्षकों की सेवा पुस्तिका की प्रमाणित प्रति भी भेजी जाएगी, ताकि पात्रता सूची तैयार कर आगे की कार्रवाई पूरी की जा सके।
भर्ती वर्ष में हुए बदलाव का भी होगा प्रभाव
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी नई नियमावली के अनुसार भर्ती वर्ष की परिभाषा में संशोधन किया गया है। अब भर्ती वर्ष 1 जुलाई के स्थान पर 1 जनवरी से प्रारंभ माना जाएगा। वर्ष 2026-27 के लिए भर्ती वर्ष 1 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक सीमित रहेगा। इसी संशोधित व्यवस्था के अनुसार पात्रता सूची तैयार की जाएगी।
एक सप्ताह में मांगी गई सूचना
शिक्षा निदेशालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि निर्धारित प्रारूप में सूचना संकलित कर एक सप्ताह के भीतर सेवा पुस्तिका की प्रमाणित प्रति सहित निदेशालय को उपलब्ध कराई जाए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मामला न्यायालय से संबंधित होने के कारण इसे सर्वोच्च प्राथमिकता पर निस्तारित किया जाए।
किन शिक्षकों को मिल सकता है लाभ?
नियमों के अनुसार ऐसे प्रधानाध्यापक/प्रधानाध्यापिकाएं, जिन्होंने भर्ती वर्ष के प्रथम दिन तक अपने पद पर कम से कम 10 वर्ष की नियमित सेवा पूरी कर ली है, वे निर्धारित नियमों के अंतर्गत पदोन्नति के लिए पात्र हो सकते हैं। अंतिम पात्रता का निर्णय विभाग द्वारा अभिलेखों की जांच के बाद किया जाएगा।







